पीएम जनधन योजना के तहत बैंकों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को खाते खोले। पहले चरण में हर घर में एक बैंक खाता होने का लक्ष्य पूरा किया गया था। जबकि दूसरे चरण में हर घर में सभी लोगों को बैंक खाता खोलने पर काम किया गया। वर्ष 2014 से अभी तक योजना के तहत लोगों के खाते खोले जा रहे हैं। गौतमबुद्घ नगर में मौजूदा समय तक 13 लाख बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें से 62 प्रतिशत खाते पुरुषों के हैं और करीब 35 फीसदी महिलाओं के हैं जबकि बाकी किशोर और युवाओं के हैं। जिले में इस समय 9,96,004 बैंक खाते चालू हैं। बाकी तीन लाख खाते आठ साल के अंदर बंद हो चुके हैं। इन 9,96,004 में से 8,91,805 बैंक खातों में इस समय लेनदेन हो रहा है। बाकी 1,04,199 खाते अभी निष्क्रिय है। इन खातों में दो साल से कोई लेनदेन नहीं हुआ है और बाकी बैंक खातों में भी लेनदेन नाममात्र का ही हो रहा है। प्रत्येक खाते में औसतन 1000 रुपये का लेनदेन हुआ है। काफी खाते ऐसे हैं, जिनमें एक बार भी पैसों का लेनदेन हुआ है। खाता धारक पैसा जमा नहीं कर रहे हैं। योजना के बैंक खातों की स्थिति से जिले की अर्थव्यवस्था का भी आंकलन किया जा सकता है।
आर्थिक तंगी व दो अकाउंट मुख्य कारण
जिले में जनधन योजना के सफल नहीं होने के दो मुख्य कारण हैं। इनमें एक दो बैंक अकाउंट होना और दूसरा आर्थिक तंगी है। जिले के लीड बैंक मैनेजर विदुर भल्ला ने बताया कि योजना के तहत काफी ऐसे लोगों को खाता खोल दिया गया। जिनके पहले से ही दूसरे बैंकों में भी खाते थे। साथ ही लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का भी प्रमुख कारण है। खाता बंद होने या निष्क्रिय होने का 50 प्रतिशत कारण आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होना है।
15 अगस्त, 2014 में शुरू हुई थी जनधन खाता
प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत 15 अगस्त, 2014 को हुई थी। तब से अभी तक आठ साल हो चुके हैं। कुछ समय पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री ने कुछ आंकड़े जारी किए थे। इसके तहत देश भर में योजना के तहत 46 करोड से अधिक बैंक खाते खुल चुके हैं। इनमें 1.74 लाख करोड़ रुपए जमा हैं। लाभ लेने वाली 67 प्रतिशत आबादी ग्रामीण हैं। जबकि 56 प्रतिशत महिलाओं ने खाते खुलवाए हैं।