दिल्ली सरकार अनधिकृत कॉलोनियों में जल्द रजिस्ट्री शुरू करेगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली बैठक में यह फैसला मंगलवार को लिया गया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा है कि कॉलोनी का लेआउट प्लान रजिस्ट्री शुरू करने के लिए जरूरी नहीं है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि जैसे-जैसे अनधिकृत कॉलोनियों की सीमा तय होती रहेगी, एमसीडी को लेआउट प्लान और डीडीए को लैंड यूज चेंज करने के लिए भेजते रहेंगे। लेआउट प्लान की वजह से रजिस्ट्री शुरू करने में देरी नहीं करेंगे।
सीमा तय करने के बाद उन कॉलोनियों में रजिस्ट्री शुरू कर देंगे। दिल्ली सरकार ने इस काम के लिए सैटेलाइट और टोटल सॉल्यूशन तकनीक के इस्तेमाल का फैसला किया है। नियमन में 1 जून, 2014 को कॉलोनी की मौजूदगी और एक जनवरी 2015 तक की बसावट को आधार मानकर बाउंड्री तय होगी।
कांग्रेस-भाजपा कर चुकीं अब आप की बारी
मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द कॉलोनियों की चारदीवार तय करने का काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साप्ताहिक रिपोर्ट मांगी गई है। उपमुख्यमंत्री ने एमसीडी की तरफ से लेआउट प्लान पास नहीं किए जाने पर नियमन रुकने के सवाल पर कहा है कि जब तक लेआउट प्लान करने का मामला आएगा तब तक एमसीडी में भी आम आदमी पार्टी की सत्ता होगी। आप ने जो वादा किया था, उसे पूरा करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा पहली बार नहीं हो रही है। आम आदमी पार्टी से पहले कांग्रेस और राष्ट्रपति शासन के दौरान भाजपा यह घोषणा कर चुकी है। 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने अस्थायी प्रमाणपत्र भी दे दिया था लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि कॉलोनियों की स्थिति जो थी, वही है। यह काम इतना आसान नहीं है। इनमें तमाम सरकारी एजेंसियों की आपत्तियाें और प्रावधानों का भी ख्याल रखना पड़ेगा।
‘आप’ ऐसे करेगी कॉलोनी नियमन
राजनीतिक दलों के खेल में अनधिकृत कॉलोनी निवासियों के हाथ दिल्ली की तीसरी पार्टी नियमन का झुनझुना पकड़ाने जा रही है। 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने नियमन का प्रोविजनल सर्टिफिकेट दिया, 2013 चुनाव में 895 कॉलोनी कागजी तौर पर नियमित कीं। फिर राष्ट्रपति शासनकाल में भाजपा ने कॉलोनी नियमन की घोषणा की। वास्तव में न तो इन कॉलोनियों में नक्शा पास हुआ और न ही रजिस्ट्री शुरू हुई। अब नियमन का वादा करके सत्ता में आई आम आदमी पार्टी फटाफट नियमन करने की घोषणा की है।
कांग्रेस शासनकाल में भी कोशिश हुई थी लेकिन शहरी विकास विभगा ने बाद में खुद पत्र लिखकर केंद्र सरकार से कई मामलों में छूट मांगी थी। जिसमें केन्द्र की कोई स्वीकृति नहीं मिली है। फिर 1650 अनधिकृत कालोनी में डीडीए, वन विभाग, एएसआई समेत तमाम सरकारी एजेंसी की आपत्तियां हैं। सरकारी जमीन पर बसी कालोनी को नियमित करने के लिए जमीन की कीमत भी लेनी होगी। कोर्ट ने एक आदेश में साफ किया है कि यूं ही नियमित करके अनधिकृत कॉलोनी को बढ़ावा न दिया जाए। ललिता पार्क में अनधिकृत निर्माण के कारण गिरे मकान के बाद एक आयोग ने जो रिपोर्ट दी थी, उसमें भी तमाम सुझाव दिए गए थे।
कांग्रेस शासनकाल में भी 895 नियमित कॉलोनियों में से प्राइवेट जमीन पर बसीं 321 में रजिस्ट्री का आदेश दिया था। लेकिन उसमें इतने ब्रेक थे कि फायदा किसी को नहीं मिला। प्राइवेट जमीन पर बसी सिर्फ 111 कॉलोनी ही ऐसी हैं जिसमें लोगों के पास मालिकाना है। बाकी कॉलोनी धारा 81 के तहत ग्रामसभा में शामिल की जा चुकी हैं। जब तक निजी व्यक्ति को मालिकाना हक कागजों में नहीं दिया जाता तो रजिस्ट्री कैसे होगी।
एमसीडी की बुक प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन आज से
उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि बुक प्रॉपर्टी (अवैध निर्माण या अन्य तरह के नियम उल्लंघन) का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से शुरू किया गया है। राजस्व विभाग को आदेश दिए गए हैं कि बुधवार से ऐसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन शुरू करें। बुक प्रॉपर्टी सूची में शामिल होने के कारण एमसीडी के 12 जोन में लाखों प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री राजस्व विभाग नहीं करता है। लंबे समय से इस तरह की प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की मांग चली आ रही थी।
दिल्ली सरकार के अधिकारी बताते हैं कि 2011 से बुक प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन बंद है। ऐसी प्रॉपर्टी की सूची एमसीडी रेगुलर भेजता है। तर्क था कि कोई व्यक्ति जब मकान खरीद लेता था तो बाद में एमसीडी की तरफ से तोड़फोड़ किए जाने पर खरीददार का पैसा डूब जाता था। हालांकि 2011 के पहले बुक प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री की जाती थी लेकिन सब-रजिस्ट्रार उस पर एक मुहर लगा देते थे।
बुक प्रॉपर्टी में रिहायशी के साथ-साथ कमर्शियल प्रॉपर्टी भी शामिल है। हालांकि विभाग ने मंगलवार देर रात तक बुक प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया था जिसके कारण बुधवार को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में झगड़े हो सकते हैं।