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Delhi: शरजील-उमर को जमानत न मिलने के बाद JNU में आधी रात प्रदर्शन, पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी

Tue, 06 Jan 2026 02:29 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 के दंगों की साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के बाद जेएनयू के छात्रों के एक ग्रुप ने यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर विवादित नारे लगाए।
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जेएनयू - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सोमवार रात को साबरमती हॉस्टल के बाहर कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी की गई। इस संबंध में सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया है। इस मामले पर जेएनयू सुरक्षा विभाग ने वसंत कुंज(नॉर्थ) थाना एसएचओ को मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत पत्र दिया है।

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नारेबाजी का आरोप जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों सहित कई दूसरे छात्रों पर लगा है। दरअसल, छात्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगे मामले में आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने और पांच जनवरी 2020 को परिसर में हुई हिंसा के खिलाफ नाराजगी और आक्रोश व्यक्त करने के लिए जुटे थे। इस बीच छात्रों की ओर से कथित आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी की गई। इस मामले पर जेएनयू सुरक्षा विभाग द्वारा एसएचओ को लिखे पत्र के अनुसार साबरमती हॉस्टल के बाहर जेएनयू छात्र संघ से जुड़े छात्रों की ओर से गुरिल्ला ढाबा पर प्रतिरोध की रात शीर्षक के तहत एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसका उद्देश्य पांच जनवरी 2020 को जेएनयू में हुई हिंसा की छठी वर्षगांठ मनाना था। कार्यक्रम की शुरुआत के समय ऐसा लगा कि छात्र सिर्फ वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ही आए थे।

नारेबाजी के समय यह छात्र थे मौजूद
इस मौके पर छात्रों की संख्या लगभग 30-35 थी। कार्यक्रम के दौरान पहचाने गए प्रमुख छात्रों में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के.गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली के अलावा छात्र साद आजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान, शुभम और दूसरे छात्र शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर न्यायिक फैसले के बाद सभा का स्वरूप और लहजा बदल गया। कुछ छात्रों ने बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और उत्तेजक नारे लगाने शुरू कर दिए। यह देश के सुप्रीम कोर्ट का प्रत्यक्ष अपमान है। इस तरह के नारे लगाना लोकतांत्रिक असहमति के बिल्कुल विपरीत है।
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जानबूझकर परिसर में लगाए गए भड़काऊ और उत्तेजक नारे
यह जेएनयू आचार संहिता का उल्लंघन है। इससे सार्वजनिक व्यवस्था, परिसर में सद्भाव और विश्वविद्यालय के सुरक्षा और सुरक्षा वातावरण में गंभीर रूप से गड़बड़ी पैदा होने की संभावना है। पत्र के अनुसार नारे स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे। नारे जानबूझकर लगाए और उनको बार-बार दोहराया गया। जिससे यह संकेत मिलता है कि यह जानबूझकर और सोच-समझकर किया गया दुर्व्यवहार था न कि कोई सहज या अनजाने में की गई अभिव्यक्ति। यह कृत्य संस्थागत अनुशासन, शिष्ट संवाद के स्थापित मानदंडों और विश्वविद्यालय परिसर के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल की जानबूझकर अवहेलना को दर्शाता है। घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद और स्थिति पर कड़ी नजर रख हुए थे। विभाग को निर्देश मिले है कि इस घटना में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करवाई जाएं।

जेएनयू प्रशासन की शांति और सद्भाव की अपील
वहीं इस पूरे मामले की रिपोर्ट सुरक्षा विभाग की ओर से जेएनयू चीफ प्रॉक्टर को भी सौंप दी गई है। आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी को लेकर जेएनयू रजिस्ट्रार ने बयान जारी किया है। इसके अनुसार जेएनयू प्रशासन ने साबरमती परिसर में आयोजित विरोध प्रदर्शन के वायरल वीडियो पर गंभीर संज्ञान लिया है। जिसमें जेएनयू छात्र संघ के छात्रों के एक समूह ने बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और उत्तेजक नारे लगाए हैं। सुरक्षा शाखा को जांच में पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए कहा गया है। सभी हितधारकों को असहमति, गाली-गलौज और घृणास्पद भाषण के बीच के स्पष्ट अंतर को समझना चाहिए जो सार्वजनिक अव्यवस्था का कारण बन सकता है। सभी से अनुरोध है कि वह इस प्रकार की किसी भी अनुचित गतिविधि में शामिल होने से बचें और परिसर में शांति और सद्भाव बनाए रखने में सहयोग करें। ऐसा न करने पर नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जेएनयू का विवादों से है पुराना नाता
जेएनयू में भड़काऊ और आपत्तिजनक नारेबाजी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जेएनयू छात्रों के ऊपर नारेबाजी, प्रदर्शन और पुतला दहन करने के आरोप लगते रहे है। पिछले एक वर्ष से जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों और प्रशासन के बीच कई मामलों को लेकर गतिरोध देखने को मिला है। इसमें डॉ. बीआर अंबडेकर लाइब्रेरी में तोड़फोड़ करने से लेकर जेएनयू की दीवारों पर विवादित नारेबाजी लिखने के मामले सामने आ चुके है।

दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा बोले- यह बस उनकी छटपटाहट है
दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, 'बात जेएनयू की नहीं है, कुछ लोग हैं जो इस प्रकार के देश विरोधी, धर्म विरोधी नारे लगाते हैं। ये अफजल गुरू के लिए भी नारे लगाते हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ, आतंकियों के समर्थन में, नक्सलियों के समर्थन में नारे लगाते हैं लेकिन कुल मिलाकर इनके नारे बस नारे तक ही सीमित हैं। जहां नक्सलवादी होते थे वहां नक्सलवादी खत्म हो गए हैं, जहां आतंकवादी होते थे वहां आतंकवादी खत्म हो गए हैं और जिन लोगों ने दिल्ली के खिलाफ साजिश रची उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है, तो यह बस उनकी छटपटाहट है।'

यह निंदनीय है और देश के खिलाफ है: दिल्ली के मंत्री आशीष सूद
दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ने कल जेएनयू कैंपस में पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ हुई कथित नारेबाजी पर कहा, 'उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने के बाद जेएनयू में इस प्रकार के नारे लगना निंदनीय है। शरजील इमाम ने चिकन नेक काटकर पूर्वोत्तर भारत को अलग करने की बात कही थी। उमर खालिद ने 'भारत के टुकड़े-टुकड़े होंगे' के नारे लगाए थे और 2020 के दंगों में भी उसका हाथ पाया गया था। ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति इसलिए दिखाई जाती है क्योंकि इस विधानसभा में ऐसे लोग हैं जिन्होंने शरजील इमाम के साथ मंच साझा किया था। जब आप ऐसे लोगों को बढ़ावा देते हैं, तो जेएनयू में ऐसे गैर-जिम्मेदार तत्व सिर उठाते हैं, जिसकी मैं निंदा करता हूं। जेएनयू में जो हुआ है, जहां शरजील इमाम और उमर खालिद का एक तरह से समर्थन किया गया है, यह निंदनीय है और देश के खिलाफ है।'

हम सब आहत हुए थे: आरजेडी सांसद मनोज झा
वहीं, आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा, 'मैं स्पष्ट तौर पर एक बात कहूं तो हम सब आहत हुए थे। एक-दो बातें बहुत चिंताजनक हैं, किसी को बिना ट्रायल के इतने वर्षों तक जेल में कैसे रखा जा सकता है, ताकि इसे सहनशक्ति की आखिरी परीक्षा माना जाए, और तभी उनके संवैधानिक अधिकार एक्टिवेट हों? व्यक्तिगत तौर पर मैं मुर्दाबाद के नारों का विरोधी हूं, और इसलिए ऐसे नारों की एक सभ्य लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है। लेकिन यह चयनात्मक गुस्सा क्या है? जब बिहार की लड़कियों के बारे में कुछ कहा गया, तो किसी ने कोई गुस्सा क्यों नहीं दिखाया? हमारे लोकतंत्र में यह अस्वस्थ होने वाले लक्षण है।'

यह 21वीं सदी का नरेंद्र मोदी का भारत है: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, 'जेएनयू 'टुकड़े-टुकड़े गैंग', राहुल गांधी जैसी देश विरोधी मानसिकता वाले लोग, चाहे वह आरजेडी हो, डीएमसी हो, या वामदल हो उनका कार्यालय बन गया है। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह भारत है, यह 21वीं सदी का नरेंद्र मोदी का भारत है। विवेकानंद ने कहा था कि भगवा ही होगा। मैं 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' से कहना चाहता हूं कि जो लोग उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोगों का समर्थन करते हैं, जो पाकिस्तान की सोच रखते थे और चिकन नेक को अलग करने की बात करते, वे देशद्रोही हैं।'
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कोई भी सुप्रीम कोर्ट से ऊपर नहीं है: अरविंद सिंह लवली
भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने कहा, 'इस देश में कोई भी सुप्रीम कोर्ट से ऊपर नहीं है। इस देश में न्याय व्यवस्था से ऊपर कुछ भी नहीं है, और सरकार भी इसका पालन करने के लिए बाध्य है। इस तरह से उस न्याय का विरोध करना और सिर्फ राजनीति करना, इसका मतलब है कि आप देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं। मैं ऐसे लोगों की निंदा करता हूं जो इस देश को टुकड़ों में बांटने की कोशिश कर रहे हैं।'

वहीं, भाजपा नेता करनैल सिंह ने कहा, 'ये शरारती तत्व देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमारा देश कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम है। ऐसा कुछ नहीं होने वाला है।'

उधर, भाजपा विधायक हरीश खुराना ने कहा, 'ये जो देश विरोधी कार्य कर रहे हैं, उनपर नकेल कसने का समय आ गया है। मुझे लगता है कि दिल्ली पुलिस इसपर सख्त कार्रवाई करेगी।'
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