फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिस मासूम को डॉक्टरों ने मृत बताया फिर हुआ जिंदा, उसी की 30 घंटे बाद हो गई मौत

Tue, 20 Jun 2017 09:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

-प्रि-मेच्योर बच्चे को सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने बता दिया था मृत
-परिजन दफनाने गए तो पता चला जिंदा है, उपचार के दौरान मौत
-ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक और नर्स को कारण बताओ नोटिस
विज्ञापन
child
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सफदरजंग अस्पताल में रविवार को जन्मा नवजात आखिरकार सोमवार शाम जिंदगी की जंग हार गया। चिकित्सकों की ओर से दो बार मृत मान लेने के बावजूद जीने की जिद्द ने उसे तीस घंटे तक जिंदा रखा, पर जिंदगी शायद उसके नसीब में नहीं थी।
विज्ञापन


सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने इस नवजात को मृत बताकर एक थैली में डालकर परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया था, लेकिन दफनाने से पहले रोने की आवाज सुनकर उसके जिंदा होने का पता चला और इसके बाद उसे वापस अस्पताल की नर्सरी में भर्ती किया गया था।

उपचार के दौरान सोमवार को एक बार फिर इस नवजात ने डॉक्टरों को हैरान कर दिया। दोपहर तीन बजे उसे मृत मान लिया गया था, लेकिन बाद में उसकी सांस चलती मिली। उधर इस मामले में अस्पताल-प्रशासन की ओर से बनाई गई जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक और नर्सेज को कारण बताओ नोटिस देने की तैयारी की जा रही है। 
विज्ञापन


अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.ए.के.रॉय ने बताया कि बच्चे को करीब 4.15 बजे पर सभी चिकित्सीय जांच-पड़ताल के बाद मृत घोषित कर दिया गया। इससे पहले दोपहर तीन बजे भी नवजात को मृत घोषित कर दिया गया था लेकिन दुबारा से जब उसका ईसीजी किया गया तो देखा गया कि उस कुछ धड़कन शेष है।

इसके बाद चिकित्सकों ने नवजात को बचाने की कोशिश की लेकिन तमाम कोशिशें नाकाम हो गई। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने रिपोर्ट दे दी है। रिपोर्ट के बाद निर्णय लिया गया है कि इस मामले में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक और नर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
विज्ञापन

बेहद नाजुक थी हालात 

जन्म के बाद नवजात की हालत बेहद नाजुक थी और वजन भी 460 ग्राम था। नवजात की उम्र 22 से 24 सप्ताह के बीच थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भी इतने कम उम्र के भ्रूण और 500 ग्राम से कम वजन के नवजात को जिंदा नहीं माना जाता है।

इस मामले में भी यही हुआ है, लेकिन मौत घोषित करने की प्रक्रिया में कुछ लापरवाही हुई है। दरअसल बदरपुर निवासी शांति को गंभीर हालत में तीन दिन पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

शांति की हालत खराब थी लिहाजा चिकित्सकों ने सर्जरी कर नवजात का जन्म कराया। जन्म के बाद देखा गया कि नवजात में हलचल नहीं थी इसके बाद परिजन को बता दिया गया कि इसकी मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें