गोकसी में लिप्त परिवारों में हुई मौत के जनाजे की नमाज इमाम नहीं पढ़वाएंगे। साथ ही निकाह के दौरान बैंडबाजा, डीजे बजाने और आतिशबाजी के इस्तेमाल के लिए परिवारों को हतोत्साहित किया जाएगा।
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यह संकल्प मौलाना, इमाम, काजी और सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार को इस्लाहे माशरात तंजीम के तत्वावधान में आयोजित ‘दीन के रास्ते पर चलकर बुराई से बचो’ कांफ्रेंस में लिया।
गढ़ के मोहल्ला मदरसा में शादाब कुरैशी के अहाते में हुई कांफ्रेंस में उलेमा समेत सैकड़ों लोगों ने शिरकत की। कांफ्रेंस में दीन के बताए रास्ते पर चलकर बुराइयों से बचने और बच्चों को अच्छी तालीम देने की नसीहत दी गई।
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उलेमा के इस फैसले पर अमल करने का हर किसी ने लिया संकल्प
- फोटो : अमर उजाला
दरगाह शरीफ जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद अनस ने कहा कि अमनचैन और भाईचारे की भावना को कमजोर करने वाली अधिकांश घटनाओं के पीछे गोकसी और तस्करी सबसे अहम वजह बनती है।
हर किसी को वतन की खुशहाली के लिए सहयोग करना होगा। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि प्रतिबंधित पशु के मांस के प्रयोग और गोकसी में संलिप्त परिवारों में अगर कोई मौत होती है तो वह उसके जनाजे की नमाज अता नहीं कराएंगे।
साथ ही काजी ऐसे परिवारों का निकाह भी नहीं पढ़वाएंगे। निकाह या खुशी के मौकों पर बैंडबाजा, डीजे और आतिशबाजी प्रयोग करने वाले लोगों और उनकी दावतों का बहिष्कार करना होगा।
बैंडबाजा, डीजे बजाने व आतिशबाजी का भी निकाह में करेंगे विरोध
डेमो पिक
शहर काजी हाजी सैयद मौलाना कसीमुद्दीन ने कहा कि निकाह के मौके पर जिस परिवार में भी बाजा और डीजे बजेगा वह दूल्हा-दुल्हन का निकाह नहीं पढ़ाएंगे।
इस दौरान हाजी डॉ. अब्दुल अली, पूर्व पालिका सदस्य शाहनवाज कुरैशी, मुहम्मद शादाब, मुन्ना कुरैशी, हाजी इरशाद, शाह आलम, शाहरुख, लईक अहमद, शानू, सौमीन, हाजी मुहम्मद उमर, सईद कुरैशी आदि मौजूद रहे।
ब्लॉक से लेकर राष्ट्रीयस्तर तक छेड़ेंगे मुहिम
गंगानगरी से शुरू इस मुहिम को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाएगा। जमाते अमीर अकरम कुरैशी और इंतजार चौधरी ने कहा कि पश्चिमी सभ्यता की बुराइयों के खिलाफ यह मुहिम बेहद सराहनीय है। जिसमें हर किसी को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अपने ब्लॉक, तहसील, जिला, मंडल और प्रदेश समेत राष्ट्रीय स्तर पर इस मुहिम को आगे बढ़ाया जाएगा।
गोकसी पर रोक लगानी होगी। तस्करों का सामाजिक बहिष्कार करना होगा। पश्चिमी संस्कृति की बुराईयों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने की जरूरत है।-मुफ्ती मुहम्मद अनस
समाज में फैल रहीं बुराइयों की रोकथाम के लिए मजहबी उलेमाओं की मुहिम बेहद सराहनीय है। इसके बहुत जल्द अच्छे नतीजे सामने आने तय हैं।-उस्ताद शायर जमील मजहर
समाज में फैल रहीं बुराइयों की रोकथाम के लिए उलेमाओं का आगे आने जरूरी है। क्योंकि वे ही कुरान और हदीस की रोशनी में जानकारी देते हैं।-फखरू प्रधान
डीजे, बैंडबाजा, आतिशबाजी, नाचगाना ये सब फिजूलखर्ची बढ़ाता है। दहेज लेने वालों को भी हतोत्साहित किया जाएगा। हर कोई अपना सहयोग दे रहा है।-डॉ. फराहीम, कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष