आम आदमी पार्टी सरकार को सत्ता संभाले दो साल पूरे हो रहे हैं। परंपरागत पार्टी या सरकार की लीक से हटकर चलने वाली सरकार ने दो साल में शिक्षा और स्वास्थ्य में दिखने लायक काम किए तो कई मामलों में सब कुछ बदलने की चाहत से वोट करने वाले मतदाताओं को निराशा भी मिली।
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मनीष सिसोदिया ने लाइब्रेरी का किया उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के शिक्षा विभाग का मॉडल स्कूल राजपथ पर भी दिखा लेकिन मेगा बजट के लिए राजस्व जुटाना और रखे गए बजट खर्च में सरकार पिछड़ रही है।
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- फोटो : अमर उजाला
स्कूलों में रीडिंग मेला, पाठ्यक्रम में हल्के बदलाव और प्रधानाचार्यों का देश-विदेश की नामचीन संस्थाओं में प्रशिक्षण का सुधार देखने को मिला तो स्वास्थ्य में मोहल्ला क्लीनिक का डंका बजा है।
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- फोटो : Demo Pic
हालांकि नए राशन कार्ड न बनना, महिला सुरक्षा दल, फ्री वाईफाई-सीसीटीवी व नई बसें नहीं आने से दो साल की सत्ता पर सवाल पूछे जा रहे हैं। वाईफाई में अभी टेंडर का आरएफक्यू नहीं हुआ तो आम आदमी कैंटीन का एक जगह पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ।
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- फोटो : PTI
सत्ता में आने पर जहां झुग्गी, वहीं मकान का वादा करने वाली सरकार की नई स्लम पॉलिसी को उपराज्यपाल से मंजूरी नहीं मिली है। बेशक जनवरी, 2015 तक के झुग्गी मालिकों को मकान दिलाने की शर्त शामिल है लेकिन नई झुग्गी न बने इसके लिए मुखबिर नियुक्ति या अन्य काम शुरू नहीं हो सके हैं।
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प्रतीकात्मक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
अनधिकृत कॉलोनियों का नियमन, पुनर्वास कॉलोनी को मालिकाना हक में सरकार वहीं खड़ी है, जहां दो साल पहले थी। केंद्र सरकार ने नियमन को लेकर जो सवाल पूछे हैं, उसका जवाब अंतिम नहीं हो सका है। पुनर्वास कॉलोनी मालिकाना हक का फैसला शीला सरकार करके गई थी, नई सरकार की कैबिनेट ने भी मंजूरी दी लेकिन फैसला आगे नहीं बढ़ा है।
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- फोटो : अमर उजाला
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को स्पीड देने वाली आप सरकार ने मेट्रो रेल फेज-चार को कैबिनेट से मंजूरी देने में करीब-करीब दो साल लगा दिए। जनवरी, 2017 में मंजूरी दी जिसमें केंद्रीय करों की भरपाई नहीं करने की शर्त से अभी मामला फंसता नजर आ रहा है।
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बिजली
- फोटो : amar ujala
आप सरकार ने दो साल में बिजली में सब्सिडी दी और दरें भी नहीं बढ़ने दी। इससे जनता खुश है। लेकिन सीएजी ऑडिट का मामला फंसा है और नई वितरण कंपनियां उतारकर जनता को विकल्प और कंपनी की प्रतिस्पर्धा देने का वादा पूरा नहीं कर सके। स्कूलों की दशा सुधरी लेकिन नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, सीसीटीवी कनेक्टिविटी का वादा भी पूरा नहीं हुआ।
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- फोटो : ani
दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र से आगे दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए रायशुमारी के आगे नहीं बढ़ने और उसमें क्या आया इसका खुलासा भी आप सरकार ने नहीं किया।
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महाआरती
- फोटो : अमर उजाला
वहीं दिल्ली में लोकपाल नियुक्ति और समयबद्ध सेवा का अधिनियम पास करके केंद्र को भेजने के अलावा पुराने समयबद्ध सेवा कानून में ढिलाई, यमुना पर महाआरती करने के अलावा सफाई में कुछ खास न दिखने से भी सत्ता के दो साल पर विपक्षी दल और जनता सवाल उठाती कहीं भी दिख जाती है।
जिन कार्यों में मिली ज्यादा निराशा
-फ्री वाईफाई के सिग्नल का इंतजार और सीसीटीवी भी नहीं लगे। पायलट प्रोजेक्ट भी कागज से बाहर नहीं। इस बीच केंद्र व उपराज्यपाल के साथ खुली लड़ाई।
-डीटीसी में नई बसों की संख्या 5000 बढ़नी थी लेकिन एक भी नहीं बढ़ी। सर्विस में सुधार नहीं हुआ। लास्ट माइल कनेक्टिविटी देने में भी सरकार पिछड़ी।
- अनुबंधित कर्मचारियों का नियमन न होना, डीटीसी में कंडक्टर-ड्राइवर और स्कूलों में अतिथि शिक्षक नहीं हुए नियमित। अस्पतालों में डॉक्टर-नर्स भी नहीं हुए नियमित।
- राजनीति में व्हीप जारी करने की प्रथा को कायम रखकर पंकज पुष्कर और देवेंद्र शहरावत को बांधकर रखना।
-ओला-उबर जैसी कंपनियों के कैब संचालन को नियमित न करना और पूछ-ओ एप को बढ़ाने में असफलता।
- महिला सुरक्षा दल में 15 हजार होमगार्ड लगाकर सुरक्षा देने और मोबाइल सुरक्षा बटन पर नहीं दिया ध्यान।
- रोजगार के 8 लाख नए अवसर पैदा करने या निजी स्टार्टअप में आगे बढ़ने का वादा भी नहीं बढ़ा आगे। बिजली वितरण के लिए नई कंपनियां लाकर प्रतिस्पर्धा भी शुरू नहीं हुई।
-खाद्य सुरक्षा कार्ड की संख्या न बढ़ना या जांच पड़ताल को मूर्त रूप देकर जरूरतमंद को शामिल नहीं करने से निराशा मिली।
--किसी नए अस्पताल का ना तो शुभारंभ और ना ही शिलान्यास हुआ। सड़क-फ्लाईओवर की नई परियोजनाएं नहीं आईं सामने, सड़कों के गढ्ढों ने बढ़ाई है परेशानी।
-दिल्ली डॉयलॉग कमीशन समेत तमाम पदों पर पार्टी से जुड़े लोगों की नियुक्ति, उपराज्यपाल व केंद्र सरकार से हर मुद्दे पर लड़ाई।