राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण फैलाने को लेकर वाहनों की तुलना करें तो दोपहिया वाहन सबसे ज्यादा प्रदूषण फैला रहे हैं। अन्य वाहनों के मुकाबले दोपहिया वाहन दिल्ली में सबसे ज्यादा 78.45 प्रतिशत प्रदूषण फैला रहे हैं। दूसरे नंबर पर कारें हैं। प्रदूषण फैलाने में अन्य वाहनों के मुकाबले कारों का प्रतिशत 17.06 फीसदी है।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
पिछले कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के नियमों के कारण कुछ वाहनों को हटाया भी गया है। दिल्ली में पंजीकृत वाहनों की कुल संख्या 1.5 करोड़ से अधिक है, जो मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के कुल वाहनों की संख्या के बराबर है। दिल्ली में वायु प्रदूषण में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन एक प्रमुख कारक है, और सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है।
दिल्ली में कितने वाहन
साल 2023 के अंत तक दिल्ली में कुल 79.5 लाख वाहन पंजीकृत थे, जिनमें से 20.7 लाख निजी कारें थीं। सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार एक समय में दिल्ली में करीब 1.5 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत थे। हालांकि, हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि अब इसकी संख्या में काफी गिरावट आ चुकी है।
प्रदूषण के चालान को लेकर दिल्ली-एनसीआर में विशेष नियम
चालान से बचने के तरीके
एक्यूआई में सुधार, जहरीली फिजा बरकरार
राजधानी में हवा की दिशा बदलने से प्रदूषण में भले ही थोड़ा सुधार आया हो, लेकिन जहरीली फिजा से लोंगों को राहत नहीं मिल रही है। मंगलवार सुबह की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे से हुई। वहीं, आसमान में स्मॉग की चादर भी दिखाई दी। इसके चलते दृश्यता भी कम रही। इस दौरान लोग मास्क पहने नजर आए। साथ ही, सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 353 दर्ज किया गया। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इसमें सोमवार की तुलना में 34 सूचकांक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 373 दर्ज किया गया, यह बेहद खराब श्रेणी है। वहीं, ग्रेनो में 364, गाजियाबाद में 349 और गुरुग्राम में 303 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 220 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 21.07 फीसदी रहा। इसके अलावा, पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण 1.93, निर्माण गतिविधियां से होने वाला 3.11 और आवासीय इलाकों की भागीदारी 5.23 फीसदी रही। सीपीसीबी के अनुसार, मंगलवार को हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से 10 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 1400 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 6500 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा।
दूसरी ओर, दोपहर तीन बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 319.9 और पीएम2.5 की मात्रा 178.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि शुक्रवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में ही बरकरार रहेगी। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सीपीसीबी के अनुसार, राजधानी के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा बेहद खराब, खराब और एक में गंभीर रिकॉर्ड की गई।
इन इलाकों में इतना रहा एक्यूआई