दीपावली से पहले खुफिया एजेंसियों को आतंकी हमले का इनपुट मिला था। इसमें कहा गया था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस' (आईएसआई) और आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' के चीफ हाफिज सईद ने दीपावली पर बड़े आतंकी हमले की साजिश रची है। इनपुट में बताया गया कि अंबाला, लखनऊ और दिल्ली आतंकियों के निशाने पर हैं। खुफिया अलर्ट जारी होने के बाद 72 घंटे चले सर्च ऑपरेशन में पाकिस्तान की साजिश नाकाम कर दी गई।
दिल्ली में घुसे आतंकवादियों को फायरिंग का मौका तक नहीं मिल सका। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दोनों आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है। एक बड़े अधिकारी के अनुसार, आईएसआई ने इस बार भारतीय खुफिया एजेंसियों को गच्चा देने का प्रयास किया था।
दिल्ली और दूसरे शहरों में आतंकी हमलों की जो साजिश रची थी, उसके लिए आईएसआई ने लश्कर-ए-तैयबा का नाम आगे कर दिया था। बाद में प्लान बदलकर दिल्ली में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को हमले की जिम्मेदारी सौंप दी गई। चूंकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सचेत थीं, इसलिए समय रहते आतंकियों को दबोच लिया गया।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दक्षिण पूर्वी दिल्ली के सराय काले खां इलाके से जैश-ए-मोहम्मद के दो संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर ली है। इनमें एक 22 वर्षीय अब्दुल लतीफ मीर बारामूला जिले के डोरू गांव का निवासी है, जबकि दूसरा 20 वर्षीय मोहम्मद अशरफ खटाना कुपवाड़ा जिले के हाट मुल्ला गांव का रहने वाला है। ये दोनों आतंकी सोमवार रात को गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से दो सेमी-ऑटोमेटिक पिस्तौल और 10 कारतूस बरामद हुए हैं।
सूत्रों का कहना है कि ये आतंकी उसी साजिश का हिस्सा हैं, जो पाकिस्तानी आईएसआई ने दिल्ली और दूसरे शहरों में हमला कराने के लिए रची थी। दीपावली से पहले आईबी के 'मल्टी एजेंसी सेंटर' में इस खुफिया अलर्ट पर चर्चा हुई थी। इसमें आतंकियों के संभावित हमलों वाली जगहों का जिक्र भी किया गया है। इन जगहों में महत्वपूर्ण सैन्य एवं केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के प्रतिष्ठान शामिल रहे हैं। इस अलर्ट के बाद दिल्ली स्थित अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई। केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' मुख्यालय और आरके पुरम स्थित डीजी स्टाफ कैंप के आसपास विशेष चौकसी बरती गई।
चूंकि राष्ट्रीय राजधानी में आतंकियों को लेकर स्पेशल सेल का नेटवर्क काफी मजबूत माना जाता है, इसलिए इसे आतंकियों को खोज निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सूत्र बताते हैं कि स्पेशल सेल ने कई दिन पहले से ही अपना जाल बिछा रखा था। सेल के पास भी अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से आतंकी हमलों की सूचनाएं आती रहती हैं। त्योहार पर आईबी का अलर्ट जारी होने के बाद स्पेशल सेल की कई टीमों को सर्च ऑपरेशन में लगाया गया।
इन टीमों ने 72 घंटे से भी ज्यादा समय तक चले ऑपरेशन के दौरान दिल्ली के उन इलाकों को छान मारा, जहां पर आतंकियों के छिपे होने की संभावना रहती है। दिल्ली के सभी चेक प्वाइंट पर वाहनों की जांच करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए। केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने भी दिल्ली में अपने सभी नेटवर्क सक्रिय कर दिए थे। मुखबिरों को खास तरह की हिदायत दी गई।
राष्ट्रीय राजधानी में बाहरी लोगों के ठहरने से संबंधित तमाम ठिकानों की जानकारी स्थानीय पुलिस की मदद से जुटाई गई। अंतरराष्ट्रीय बस अड्डा कश्मीरी गेट, आनंद विहार, सराय काले खां, मेट्रो स्टेशन, रेलवे के माल गोदाम रोड और ओखला व निजामुद्दीन इलाके पर नजर रखी गई। यमुना पार के कुछ क्षेत्रों में सर्च अभियान चलाया गया।
स्पेशल सेल को अपने इस ऑपरेशन में सफलता हाथ लगी। मुखबिर के जरिए आतंकियों की सूचना मिलते ही स्पेशल सेल ने उन्हें धर दबोचा। अब दोनों आतंकियों से पूछताछ कर यह पता लगाया जाएगा कि कितने शहरों में उनके दूसरे साथी हमलों को अंजाम देने के लिए निकले हैं।