प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई पर उद्यमियों का कहना है कि यूपीपीसीबी ने पांच दिन के अंदर दो अलग-अलग तरह के नोटिस जारी किए हैं। 30 जुलाई को जारी नोटिस में 14 दिन के अंदर जवाब मांगा गया था। जबकि 3 अगस्त को कंपनी को बंद करने का नोटिस जारी कर दिया गया। उद्यमियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की है।
यूपीपीसीबी की इस कार्रवाई में सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, जिले की 54 कंपनियों को चिह्नित किया गया था। इनकी जांच की गई तो 32 कंपनियों में मानक पूरे नहीं मिले। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर यूपीपीसीबी ने इन कंपनियों पर कार्रवाई की और आठ को बंद करा दिया है। बाकी नोटिस दिया है।
जबकि, एनजीटी का फैसला आना बाकी था। उससे पहले ही यह कार्रवाई की गई। उद्यमियों की संस्था अग्नि का आरोप है कि यूपीपीसीबी ने 30 जुलाई को इन कंपनियों को नोटिस जारी किया था और 14 दिन के अंदर जवाब देने को कहा था। दिया हुआ समय पूरा भी नहीं हुआ था कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से एक ओर नोटिस जारी कर दिया गया और आठ कंपनियों का उत्पादन बंद करा दिया।
यह नोटिस 3 अगस्त को जारी किया गया, लेकिन कंपनियों के पास 8 अगस्त तक पहुंचा है। वहीं शनिवार को इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने भी मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव से शिकायत की है। उधर इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने चुप्पी साध ली है और कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।