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दो फीसदी स्टांप ड्यूटी बढ़ी, 30 हजार आवंटी भरेंगे 700 करोड़

Sun, 28 Feb 2016 07:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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संपत्ति की रजिस्ट्री पर दो फीसदी स्टांप शुल्क बढ़ने से 30 हजार संपत्ति खरीदार हर साल 700 करोड़ रुपये भरेंगे। विगत तीन वर्षों में औसतन 30 हजार बैनामे हर साल हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या फ्लैटों की करीब 18,000 है। इस साल यह संख्या और भी ज्यादा रहने का आकलन हैं।
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क्योंकि एनजीटी ने ओखला पक्षी विहार से 10 किलोमीटर के दायरे में तैयार प्रोजेक्ट को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने की छूट दे दी है और उन प्रोजेक्ट में बने फ्लैटों की रजिस्ट्री शुरू हो गई है।

मौजूदा दर पांच प्रतिशत स्टांप शुल्क पर हर तरह की संपत्ति की रजिस्ट्री होने से साल भर में करीब 1800 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क मिलता है। ऐसे में विकास शुल्क के नाम पर अगर दो फीसदी स्टांप शुल्क बढ़ाया जाता है तो करीब 700 करोड़ रुपये का बोझ खरीदारों पर पड़ेगा। यह राजस्व सरकारी खाते में जमा होगा। अगले दो से तीन महीने में इस पर अमल होने के आसार हैं।
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खरीदारों पर पड़ने वाले बोझ को इस उदाहरण से भी समझा जा सकता है। अगर किसी फ्लैट की कुल कीमत 50 लाख रुपये है तो पांच फीसदी की दर से 2.5 लाख रुपये स्टांप लगेगा। अगर यह दर बढ़कर 7 फीसदी हो जाती है तो उतनी ही कीमत के फ्लैट पर 3.5 लाख रुपए स्टांप शुल्क देना होगा।

करीब एक लाख रुपये का बोझ खरीदारों पर आ जाएगा। नोएडा में फ्लैटों की शुरुआती कीमत करीब 30 लाख रुपये से लेकर पांच करोड़ रुपये के आसपास तक फ्लैट बिकते हैं। इस लिहाज से 60 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का बोझ पड़ जाएगा।

यह है प्रस्ताव
बीते1 फरवरी को सूबे के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने प्रमुख सचिव उद्योग को पत्र लिखा है, जिसमें नोएडा-ग्रेटर नोएडा में दो फीसदी अतिरिक्त स्टांप शुल्क लेने के लिए उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 में संशोधन करने को कहा गया है।

दरअसल, नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इसी एक्ट से संचालित होते हैं, जिसमें यहां की संपत्ति लीज पर देने का उल्लेख है, जिसके लिए लीज रेंट और संपत्ति बिकने पर ट्रांसफर चार्ज लेने का ही उल्लेख है। इस संबंध में दोनों अफसरों को बैठक शीघ्र करने को कहा है।

पक्ष में नहीं है प्राधिकरण
प्राधिकरण भी सात फीसदी स्टांप शुल्क वसूलने केपक्ष में नहीं है। सूत्रों का कहना है कि अगर विकास शुल्क के नाम पर दो फीसदी स्टांप शुल्क लिए गए तो प्राधिकरण को ट्रांसफर चार्ज खत्म करने पड़ेंगे। क्योंकि दोनों में से एक ही टैक्स लिया जा सकता है। ऐसा न होने पर मामला कोर्ट तक भी जा सकता है। प्राधिकरण ट्रांसफर चार्ज और लीज रेंट के रूप में आवंटियों से भारी-भरकम टैक्स वसूल रहा है।

दो फीसदी स्टांप शुल्क बढ़ा तो यहां संपत्ति की खरीद-बिक्री बहुत कम हो जाएगी। इसका खरीदारों पर बड़ा बोझ पड़ जाएगा। इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।- एलसी शर्मा,  डीड राइटर

रजिस्ट्री विभाग के इस प्रस्ताव का  क्रेडाई विरोध करती है। रियल एस्टेट पहले से ही मंदी  के दौर से गुजर रहा है। अगर पांच फीसदी की जगह सात फीसदी स्टांप शुल्क लगा तो रियल एस्टेट खत्म हो जाएगा।  प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलकर इस पर विरोध जताया जाएगा। - मनोज गौड़, अध्यक्ष क्रेडाई एनसीआर
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