नोटबंदी के बाद से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पूरे देश में काले धन के धरपकड़ में लगा हुआ है। इसी कड़ी में ईडी ने दिल्ली के दो मार्केट एंट्री ऑपरेटर्स को करीब 8000 करोड़ रुपए के काले धन की लॉन्ड्रिंग के शक में गिरफ्तार किया है। माना जा रहा है कि यह काम इन दोनों ने मात्र पिछले तीन महीनों में किया है।
ईडी की यह जांच सीरियस फ्रॉड्स इंवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) द्वारा दर्ज किए गए केस के आधार पर कर रहा है। इस मामले में 90 शेल कंपनियां अपनी 559 सहयोगी कंपनियों के साथ संलिप्त हैं जिसमें करीब 11000 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है।
ईडी ने इस मामले में एंट्री ऑपरेटरों सुरेंद्र कुमार जैन और विरेंद्र कुमार जैन को सोमवार को गिरफ्तार किया। इन्हें मंगलवार को कोर्ट के सामने पेश किया गया जहां इन्हें 10 दिनों की हिरासत में भेज दिया गया है।
ऐसे सफेद करते हैं काला धन
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार गिरफ्तार किए गए दोनों एंट्री ऑपरेटर्स मध्यस्थों के जरिए अपने क्लाइंट से काला धन लेकर उन्हें शेल कंपनियों के शेयर प्रिमियम में बदल देते थे। इसके बदले उन्हें मोटा कमीशन मिलता था।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार दोनों जैन ऑपरेटर्स 26 शेल कंपनियों में पैसा लगाते थे। जांच में एक कंपनी का नाम मेसर्स एनकेएस होल्डिंग्स प्रा.लि. के रूप में सामने आया है, जिसे सुरेंद्र और विरेंद्र जैन नियंत्रित करते थे।
ईडी के अनुसार पिछले 3 महीने के छोटे से अंतराल में इस कंपनी के अकाउंट खुले और बंद हुए और इनमें जमा और निकाले गए रुपयों की कुल कीमत लगभग 8000 करोड़ रुपए रही।
पूरा रैकेट करीब 11000 करोड़ रुपए से ज्यादा का
प्रतीकात्मक चित्र
-ईडी अधिकारी के अनुसार ये पूरा रैकेट करीब 11000 करोड़ रुपए में चलता है।
-90 शेल कंपनियों और 559 बेनिफिशियरी कंपनियों के जरिए होता है हेरफेर।
-प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट(पीएमएलए) के तहत हुआ केस दर्ज।
-द्वारका के होटल रेडिसन ब्लू में निवेष किए 64 करोड़ रुपए।
-होटल में निवेश होने वाली राशि मेसर्स जगत प्रोजेक्ट्स प्रा.लि. की थी। ये वो पैसे थे जिनका कोई हिसाब किताब नहीं था।