सरोज के पैर में था फ्रैक्चर, चंद्रकांता को थी सांस की बीमारी
राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पोस्टमार्टम करने के बाद डॉक्टरों ने पुलिस अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से बताया था कि ननद सरोज बाला (80) की मौत के बाद सात से आठ घंटे बाद उनकी भाभी चंद्रकांता (91) की मौत हुई है। मध्य जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चंद्रकांता बैड पर थीं और वह उठ नहीं पाती थीं। उन्हें अस्थमा की बीमारी थी और सांस लेने में दिक्कत थी। उन्हें पीस मेकर लगता था। वहीं सरोज वाला के पैर में फैक्चर था और वह वॉकर से चलती थीं।
ब्रेन हेमरेज होने से हुई वृद्धा सरोज की मौत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सरोज बाला भाभी के बैड से कुछ ही दूर पर मृत पड़ी मिली थीं। जांच में ये बात सामने आई कि वह फिसल कर गई थीं। वह माथे के बल जमीन पर गिरी थीं। इस कारण उनके माथे पर चोट व सूजन थी। डॉक्टरों बताया कि ऐसे में उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया और उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई। वह गिरी तो फिर वह उठ नहीं पाईं। हो सकता है उन्होंने कोई सहायता मांगी हो। या फिर कोई देखने वाला होता या सहायता मिल जाती तो शायद आज तस्वीर कुछ और होती।
दशहत से हुई वृद्धा चंद्रकांता की मौत
पीएम करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि वृद्धा चंद्रकांता की मौत दहशत से हुई है। यानि की उन्हें एक दम शॉक लगा है। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती थी। वह पीस मेकर लगाती थीं। हालांकि जब वह मृत मिली तो उनके चेहरे पर पीसमेकर नहीं था। ये भी हो सकता है कि जब सरोज बाला गिरीं तो उन्होंने उठने की कोशिश की हो, मगर वह कुछ नहीं कर पाई। ऐसे में सरोज वाला की मौत से वह सदमे में चलीं गईं।
नहीं था कूलर व एसी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिस कमरे में दोनों वृद्धाएं मृत मिलीं उस कमरे में ऐसी सड़ी गर्मी में सिर्फ पंखा था। उस समय कमरे में कूलर या फिर एसी नहीं था। हो सकता है कि गर्मी भी इनकी मौत में सहायक बन गई हो।
26 मई को सुबह 9.30 बजे चाय पी थी
मध्य जिले के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरूआती जांच में ये बात सामने आई है कि दोनों मृतकों की काम करने या रोटी बनाने वाली दो-तीन दिन पहले काम छोड़कर चली गई थी। ऐसे में सरोज बाला ने बाहर झाडू लगाने वाली महिला से 26 मई की सुबह अनुरोध कर चाय बनवाई थी। इसके बाद शायद इन्हें खाने को कुछ नहीं मिला।
सरोज बाला ही काम करती थीं
80 वर्षीय सरोज बाला ही घर में काम करती थी। हो सकता है वह 26 मई की सुबह चार पीने के बाद आते-जाते गिर गई। इसके बाद वह उठ नहीं पाईं। ऐसे में चंद्रकांता को खाना नहीं मिला। वह काफी देर तक भूखी रही और दम तोड़ दिया। सरोज बाला के पैर में फैक्टर था। ऐसे में वह वॉकर से चलती थीं।
कहां गए थे पड़ोसी
आसपास रहने वाले लोग कहां थे। क्या उनको पता नहीं था कि फलां घर में दो बहुत ही बुजुर्ग महिलाएं रहती हैं। क्या किसी पड़ोसी को उनकी सहायता करने के लिए तरस नहीं आया। हालांकि दोनों के संतानें नहीं थी, तो क्या और रिश्तेदार कहां गए थे। क्या किसी रिश्तेदार को उनकी सुध नहीं आई।
कहां है दिल्ली पुलिस का सीनियर सिटीजन सेल
दिल्ली पुलिस की सीनियर सिटीजन सेल दिल्ली में अकेले रह रहे बुजुर्गों की देखभाल करती है। पहले से सेल दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के तहत काम करता था और अब नानक स्थित स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वीमन एण्ड चिल्ड्रन के तहत काम करता है। क्या ये सेल या उसके पुलिस कर्मी इन वृद्धाओं तक पहुंचे थे।
काम वाली ने काम छोड़ दिया था
मध्य जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार राजिंदर नगर थाना पुलिस ने पीडि़तों के यहां काम करने वाली महिला से पूछताछ की थी। महिला ने बताया कि उसने कुछ दिन पहले काम छोड़ दिया था। उनका कहना है कि इनको उसे सैलरी कम मिलती थी, दूसरा चंद्रकांता की हालत बैड पर होने के कारण बहुत ही दयनीय थी।
बृहस्पतिवार को दोनों वृद्धाओं के शव मिले थे
मध्य दिल्ली के न्यू राजिंदर नगर इलाके में बृहस्पतिवार सुबह एक घर के अंदर दो बुजुर्ग महिलाओं 80 वर्षीय सरोज बाला और उनकी भाभी चंद्र कांता(91)के शव मिले थे। सरोज बाला फर्श पर मृत पड़ी हुई थी, जबकि चंद्रकांता बैड पर मृत मिली थीं। मध्य जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया था कि पीडि़तों के घर में जबरन प्रवेश के कोई संकेत नहीं मिले हैं। सरोज बाला अविवाहित थीं और पिछले कई वर्षों से चंद्र कांता के साथ इस मकान में रह रही थीं। मध्य जिला पुलिस उपायुक्त सिंह ने बताया था कि बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे घर से दुर्गंध आने की सूचना के बाद पुलिस को इनके मृत होने का पता लगा था।