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कैंसर जैसी बीमारियों की महंगी सरकारी दवाएं बेचते थे दो भाई, गिरफ्तार

Tue, 24 Sep 2019 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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arrest - फोटो : अमर उजाला
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डिफेंस और ईएसआई अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाने वाली कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की महंगी दवाइयों का धंधा करने वाले दो सगे भाइयों को पूर्वी जिला एंटी ऑटो थेफ्ट स्कवायड (एएटीएस) ने गिरफ्तार किया है। 

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आरोपी ध्रुवनाथ झा और ओमनाथ झा इन दवाओं को खुले बाजार में आम लोगों को बेच देते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी 2.50 लाख रुपये तक की महंगी दवा महज 40 हजार रुपये में बेच देते थे। आरोपियों ने खुद को इंडिया मार्ट जैसी ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनी से रजिस्टर्ड कराया हुआ था। 

उसके जरिए महंगी दवाइयों को सस्ते दामों में बेचते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 30 लाख रुपये की दवाइयां बरामद की हैं। आरोपी अपने जानकारों से ग्वालियर, मुंबई, चंडीगढ़, लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा आदि जगहों से दवाइयां खरीदकर दिल्ली-एनसीआर में बेचते थे।
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पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त जसमीत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को जिले के एएटीएस को सूचना मिली कि कुछ लोग सरकारी अस्पताल (डिफेंस और ईएसआई) में नॉट फॉर सेल वाली कैंसर जैसी बीमारियों की महंगी दवाई खुले बाजार में बेच रहे हैं। मामले की एएटीएस इंस्पेक्टर दिनेश आर्य आदि पुलिसकर्मियों की टीम ने छानबीन शुरू की। 

एक सूचना के आधार पर 20 सितंबर को पुलिस ने प्रीत विहार स्थित पेट्रोल पंप के पास आरोपी धुव्रनाथ को दबोच लिया। उसकी स्कूटी से दवाइयों के 12 पैकेट मिले, जिन पर नॉट फॉर सेल लिखा था। आरोपी ने बताया कि वह अपने छोटे भाई ओमनाथ झा के साथ मिलकर दवाइयों का धंधा करता है। पुलिस ने लक्ष्मी नगर स्थित ऑफिस पर छापा मारकर आरोपी ओमनाथ को भी गिरफ्तार कर लिया।

दो साल से कर रहे थे धंधा
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि ओमनाथ झा पेशे से फॉर्मासिस्ट है। वह खुद दवाइयों का धंधा करता था, लेकिन जल्द पैसा कमाने के चक्कर में उसने अपने भाई ध्रुवनाथ झा के साथ मिलकर सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाइयों का धंधा शुरू कर दिया। ध्रुवनाथ 10वीं पास है। आरोपियों ने लक्ष्मी नगर इलाके में करीब दो साल पूर्व अपना दफ्तर खोला था।

ऐसे बेची जाती थी सरकारी दवाइयां
अपने जानकारों से लगभग ढाई-ढाई लाख रुपये की दवाइयों को आरोपी कम कीमत में खरीद लेते थे। इसके बाद केमिकल से दवाई की पैकिंग पर अंकित नॉट फॉर सेल की मुहर हटा देते थे। जब कोई उनसे संपर्क करता था तो आरोपी दवाई खरीदने वाले से पूछते थे कि उनको बिल वाली दवाई चाहिए या बिना बिल वाली। बिना बिल वाली दवाई के दाम यह लोग इतने कम बताते थे कि वह आसानी से बिक जाती थीं। पुलिस इनसे पूछताछ कर बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।

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