फर्जी प्रमाण पत्र पर शिक्षक बना था बजरंगी
अफसरों ने बताया कि बजरंगी ने वर्ष 2012 में एमएड की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2013 में कौशांबी के राजकीय हाईस्कूल पलाना कछार में शिक्षक के पद पर भर्ती हो गया। शिकायत पर जांच में बजरंगी की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र फर्जी मिले। शिक्षा विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया। इसके बाद से आरोपी ने फर्जीवाड़ा शुरू किया। लोगों को फर्जी नौकरी दिलाने व बर्खास्त शिक्षकों को बहाल कराने के नाम पर धन वसूली करने लगा।
17 अभ्यार्थियों की फर्जी नौकरी में जा चुका है जेल
आरोपी बजरंगी ने वर्ष 2016-17 की शिक्षक भर्ती में 17 अभ्यार्थियों से नौकरी लगवाने के नाम पर पैसा लिया। फिर फर्जी तरीके से उनकी नियुक्ति करा दी। खुलासा होने पर झांसी में केस दर्ज किए गए। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वो एसटीएफ व शिक्षा निदेशालय के नाम से बीएसए और डीआईओएस को नोटिस भेजकर अवैध उगाही करने लगा। पत्र बनाने का काम जय प्रकाश तिवारी करता था।
चार शिक्षकों को बहाल कराने का कर रहा था प्रयास
अफसरों ने बताया कि एसटीएफ की जांच के बाद प्रयागराज के बीएसए ने फर्जी दस्तावेज का प्रयोग करने पर चार शिक्षक धीरेद्र कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार, अरविंद कुमार व मोहम्मद इदरीश की सेवा समाप्त कर दी थी। आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता अपने साथी जय प्रकाश के साथ मिलकर चारों शिक्षकों के दस्तावेज सहीं दिखने का प्रयास किया। इसके लिए वीर बहादुर पूर्वाचल यूनिवर्सिटी जौनपुर से कूटरचित प्रमाण पत्र बनवा लिया। उसके आधार पर चारों शिक्षकों की बर्खास्तगी को निरस्त कराने का प्रयास कर रहा था।
बीएसए कार्यालय में टाइपिस्ट था जय प्रकाश तिवारी
आरोपी जय प्रकाश तिवारी के पिता फतेहपुर बीएसए कार्यालय में चालक थे। उस कारण कार्यालय के बाबू राजेश तिवारी से जान पहचान हो गई। कुछ दिन बाद राजेश तिवाी के साथ टाइपिस्ट का काम करने लगा। तभी उसकी मुलाकात आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता से हुई और दोनों साथ काम करने लगे। बजरंगी के कहने पर जय प्रकाश विभिन्न अध्यापकों के फर्जी दस्तावेज व कार्यालय के फर्जी नोटिस बनाकर देता था। बजरंगी इन नोटिस को संबंधित को भेजता था। साथ ही विभागीय अफसरों को एसटीएफ व अन्य अफसरों के नाम से फोन करता था। आरोपी के पास से जौनपुर की यूनिवर्सिटी की मोहर बरामद हुई है। साथ ही प्रतापगढ़, भदोही, झांसी, कौशांबी में केस दर्ज हैं।