जान से मारने की नीयत से अपहरण कर उस पर तेजाब छिड़ककर कूड़े के ढ़ेर में फेंक दिए गए मासूम को अब इलाज की दरकार है। उसका पिता आर्थिक तंगी के चलते बच्चे का इलाज कराने में मजबूर है। मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचे दुखी पिता ने अपना दुखड़ा सुनाया तो सभी की आंखे छलक उठी।
मूल रूप से यूपी के जिला उन्नाव के गांव हसनापुर के रहने वाले यमुना प्रसाद करीब एक साल पहले गुरुग्राम में परिवार के साथ रोजगार की तलाश में आए थे। यहां शांति नगर में मकान किराये पर लेकर राज मिस्त्री का काम करना शुरू किया। परिवार का गुजारा आराम से चल रहा था। 12 दिसंबर को अचानक उसकी जिंदगी में भूचाल आ गया।
ढाई वर्षीय बेटा आदित्य राज गली में खेलते समय अचानक गुम हो गया। शिकायत पुलिस से की गई। दो दिन बाद वह 14 दिसंबर को ओमनगर में कूड़े के ढेर में पड़ा मिला था। इसके बाद आरोपी की तलाश शुरू हुई तो पड़ोस में ही रहने वाले गोविंद उर्फ रामेदव को पुलिस ने गिरफ्तार किया।