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अतिथि शिक्षकों पर नौकरी जाने की लटकी तलवार

Fri, 12 Apr 2019 07:59 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले 22 हजार अतिथि शिक्षकों के सिर पर एक बार फिर से नौकरी जाने की तलवार लटक गई है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद थी। कोर्ट में सुनवाई तो हुई लेकिन अतिथि शिक्षकों के लिए कोई निर्देश या आदेश नहीं हुआ। ऐसे में अब शिक्षक असमंजस में हैं कि क्या अब अतिथि शिक्षक आगे पढ़ा पाएंगे या नहीं। शिक्षा निदेशालय से भी उन्हें कोई आदेश अब तक प्राप्त नहीं हुआ है।

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सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल 28 फरवरी 2019 को समाप्त हो चुका है। तब से वह अपने लिए 60 साल की पॉलिसी लाने की मांग को लेकर धरने पर हैं। शिक्षकों को उम्मीद थी कि कोर्ट से उन्हें कुछ राहत मिलेगी। उसके बाद शिक्षा निदेशालय उनका कार्यकाल बढ़ा देगा। शिक्षकों के अनुसार शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई तो हुई लेकिन हमारे लिए कोई आदेश नहीं आया।

अतिथि शिक्षकों का कहना है कि इस समय बड़ी उलझन है कि सुनवाई हो गयी है लेकिन आदेश कोई नहीं हुआ कि अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल आगे बढ़ाया जाए या नहीं। ऑल इंडिया गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन सदस्य शोएब राणा ने कहा कि उलझन ये भी है कि शिक्षा विभाग का पूर्व में जो सर्कुलर आया था उसमें ये लिखा था कि अगली सुनवाई पर जो आदेश आएगा वह मान्य होगा। लेकिन शुक्रवार को कोई आदेश नहीं हुआ।
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अब क्या समझा जाए कि जो 30 अक्तूबर 2018 को हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2019 तक गेस्ट टीचर्स को रखने की डेड लाइन दी थी, वह आदेश मान्य होगा। इस तरह से तो अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल 28 फरवरी 2019 को ही पूरी तरह खत्म मान लिया जाए। शिक्षकों का कहना है कि किसी की मंशा नहीं है कि हमारा कार्यकाल बढ़ाया जाए। जल्द ही स्थायी नियुक्ति करके अतिथि शिक्षकों को इस सिस्टम से बाहर करने की तैयारी की जा रही है। 

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