सदन में सत्ता पक्ष की खुशी में विपक्ष भी शामिल हुआ। भाजपा विधायक एमएस सिरसा ने कहा कि लोकतंत्र नियम-कानून से चलता है। इसकी अदायगी वह करते रहेंगे। सत्ता पक्ष की खुशी में विपक्ष भी शामिल है।
बीस विधायकों समेत मंत्री कैलाश गहलोत का उन्होंने बधाई दी। वहीं नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अदालत में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है।
कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुये उन्होंने विपक्ष को बधाई दी। साथ ही यह भी यह भी जोड़ दिया कि जिस तरह 20 विधायकों के मामले में कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय की बात कही है, उसी तरह का प्राकृतिक न्याय विपक्ष के साथ भी होना चाहिये। विधायक ओपी शर्मा को भी विधान सभा अध्यक्ष को सदन में आने की इजाजत देनी चाहिये।
इसके बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि विपक्ष की प्रतिक्रिया के वह शुक्रगुजार हैं। फैसला लोकतंत्र के लिये अहम है। जिस तरह बीस विधायकों पर आरोप लगे और बगैर सुनवाई किये उनकी रद्द कर दी गयी, उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया गया, लोकतंत्र में प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। अदालत का फैसला सत्य की लोकतंत्र की जीत है।
अदालत का फैसला आने के करीब एक घंटे बाद विधान सभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने बीस विधायकों को सदन में प्रवेश की इजाजत दे दी।
राम निवास गोयल के कहा कि जिस तरह कोर्ट का फैसला आया है, उससे वह अभी तक अयोग्य चल रहे विधायकों को सदन में आने की इजाजत दे रहे हैं। अध्यक्ष के फैसले का विधायकों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया।
अध्यक्ष केफैसले के करीब आधे घंटे बाद 3.45 बजे लक्ष्मी नगर विधायक नितिन त्यागी ने सदन में प्र्रवेश किया। विधान सभा में एक बार फिर भारत माता के जय के जयकारे लगे। वहीं, अध्यक्ष ने भी त्यागी का स्वागत किया। इसके बाद धीरे-धीरे सोमदत्त, राजेश गुप्ता, राजेश ऋषि, अलका लांबा समेत करीब दस विधायक सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने पहुंचे।
आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अदालत के फैसले से साबित हो गया है कि चुनाव आयोग ने दबाव में आकर बीस विधायकों को अयोग्य करार दिया था। फैसला लोकतंत्र की जीत है। अब आप विधायक बजट सत्र में हिस्सा ले सकेंगे।
विधान सभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने कहा कि फिलहाल मौका खुशी है। सदन हल्के मूड में दिख रहा है। ऐसे में बीते दिनों अभद्र टिप्पणी करने के एवज में सदन से निलंबित चल रहे भाजपा विधायक को भी सदन में आने की इजाजत मिलनी चाहिये।
दूसरे कई आप विधायकों ने भी इसका समर्थन किया। हालांकि, विधायक सौरभ भारद्वाज व पंकज पुष्कर ने शर्मा का निलंबन रद्द न करने की मांग अध्यक्ष से की।
इसी बीच पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र तोमर ने इससे जुड़ा एक प्रस्ताव सदन में पेश किया। सदन ने इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया।