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जुलाई तक पूरी दिल्ली में होगी टीवीसी, रेहड़ी-पटरी वालों को मिलेगी जगह

Tue, 31 May 2016 05:00 PM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
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फेरीवाले
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जुलाई तक दिल्ली के हर विधानसभा में टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) बन जाएगी। कमेटी का चेयरमैन संबंधित विधानसभा के अधिकार क्षेत्र वाले एमसीडी उपायुक्त को बनाया जा रहा है।  इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है।
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हर कमेटी में चेयरमैन समेत एक दर्जन सरकारी अधिकारी, एक दर्जन स्ट्रीट वेंडर प्रतिनिधि, मार्केट एसोसिएशन, एनजीओ और आरडब्ल्यूए समेत 30 लोग शामिल होंगे। यह कमेटी स्ट्रीट वेंडर जोन की पहचान कर लाइसेंस जारी करेगी।

हर विधानसभा की आबादी का दो फीसदी स्ट्रीट वेंडर लाइसेंस दिया जाएगा। लाइसेंसधारी को पुलिस या स्थानीय निकाय का कर्मी प्रताड़ित नहीं कर सकेगा। हालांकि निर्धारित जगह से इधर-उधर पटरी लगाने पर संबंधित एजेंसी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगी।
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दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनडीएमसी और छावनी बोर्ड ने टीवीसी गठित कर दी है। जल्द ही ये टीवीसी स्ट्रीट वेंडर्स के जीवन यापन के लिए नियम-कानून को अंतिम रूप देगी। कमेटी में स्वास्थ्य विभाग, कर विभाग, इंजीनियरिंग, तहसीलदार, खाद्य आपूर्ति अधिकारी, श्रम निरीक्षक, सैनेट्री इंस्पेक्टर, एसडीएम, एसीपी और ट्रैफिक इंस्पेक्टर होंगे। 
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जानिए क्या रहेगी व्यवस्था और क्या होगा फायदा

टीवीसी
कमेटी में सभी एजेंसी के अधिकारी शामिल होने की वजह से एक बार जगह निर्धारित होने के बाद आपत्तियों के लिए स्थान नहीं बचेगा। शहरी विकास विभाग और स्थानीय निकाय निदेशक पूरी दिल्ली में टाउन वेंडिंग कमेटी बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। 

टीवीसी यह तय करेगी
कि पूरी दिल्ली में सड़क किनारे या बाजारों में खड़े होने वाले हॉकर्स (रेहड़ी-पटरी वाले) जहां-तहां न खड़े हों। इन्हें एक निर्धारित जगह दी जाए। ऐसा करने के साथ ही कमेटी ये सुनिश्चित करेगी कि दिल्ली में हॉकर्स को पुलिस और एमसीडी परेशान न करे। नई कॉलोनी और बाजारों में आरक्षित वेंडर जोन की व्यवस्था शुरुआत में ही कर दी जाएगी। साथ ही पुरानी कॉलोनी में भी वेंडर और नॉन वेंडर जोन बनाए जाएंगे। 

टीवीसी द्वारा अलग-अलग श्रेणी में स्थायी पटरी (वेंडर) और मोबाइल वेंडर लाइसेंस भी दिए जाएंगे। लाइसेंस पर निश्चित जोन, पटरी लगाने का समय और नियम लिखा होगा। लाइसेंस बनाने व नवीनीकरण में जो शुल्क लिए जाएंगे, उस राशि से ट्रेनिंग, जागरूकता, नई पॉलिसी और व्यवसाय की जानकारी के कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
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