खोड़ा स्थित संगम पार्क में शुक्रवार रात शॉर्ट सर्किट से टीवी में आग लग गई और टीवी पिघलने से निकले धुएं में दम घुटने से दो मासूमों की मौत हो गई। चार और दो वर्षीय बच्चों को कमरे में सुलाकर मां मार्केट से सब्जी लेने गई थी।
जब घर लौटी तो कमरा धुएं से भरा था। उनके शोर मचाने पर लोगों ने बच्चों को कमरे से बाहर निकाला और दिल्ली स्थित लाल बहादुर अस्पताल ले गए।
वहां उपचार के दौरान दोनों बच्चों की मौत हो गई। लोगों का आरोप है कि पुलिस सूचना देने के बावजूद नहीं पहुंची और फिर वे ही बच्चों को अस्पताल लेकर गए।
मूलरूप से सहारनपुर निवासी दर्शन लाल संगम विहार में किराए के मकान में पत्नी संगीता, बेटों लक्की (4) और ईशू (2) के साथ रहते हैं। वह नोएडा स्थित एक निजी कंपनी में मजदूरी करते हैं।
शुक्रवार रात आठ बजे तक वह कंपनी से घर नहीं लौटे थे। इसी दौरान बच्चों को सुलाकर मार्केट से सब्जी लेने चली गईं। कमरे में संगीता ने बाहर से कुंडी लगा दी थी।
करीब आधे घंटे बाद जब वह लौटी तो कमरे से धुआं निकलता देखकर घबरा गई और शोर मचाया। इतने में आसपास के लोग इकठ्ठा हो गए। उन्होंने कमरे का दरवाजा खोला धुआं भरा हुआ था।
लोगों ने दोनों बच्चों को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के नहीं आने पर लोग बच्चों को लेकर दिल्ली स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले गए, जहां पर उपचार के दौरान देर रात करीब डेढ़ बजे दोनों की मौत हो गई।
एसएचओ खोड़ा अरुण कुमार ने बताया कि पुलिस घटनास्थल पर गई थी लेकन वहां कोई नहीं मिला। जिसके बाद आसपास के लोगों से जानकारी जुटाकर पुलिस वापस लौट आई।
मां के जाते वक्त नहीं आ रही थी बिजली
दर्शन के मकान मालिक चंदकी राम ने बताया कि जिस वक्त संगीता घर से मार्केट गई थी, तब बिजली नहीं आ रही थी। हो सकता है कि बिजली आने पर टीवी में शॉर्ट सर्किट हुआ हो और आग लग गई। जब कमरे में धुआं कम हुआ तो टीवी पूरी तरह से जल चुका था।
बच्चों के शव लेकर परिवार निकला सहारनपुर
पड़ोसियों ने बताया कि बच्चों की मौत से माता पिता सदमे में हैं। अस्पताल जाने के बाद से कोई भी कमरे पर नहीं आया है। दर्शन लाल का कमरा खुला है। दर्शन के परिजन भी खोड़ा में ही रहते हैं, अस्पताल से बच्चों के शव लेकर सभी सहारनपुर चले गए।
दो वर्ष पहले अंगीठी के धुएं से दो मजदूरों का घुटा था दम
दो वर्ष पहले खोड़ा में ही दो मजदूरों की भी दम घुटने से मौत हो गई थी। वह सर्दी के दिनों में कमरे में अंगीठी जलाकर सो गए थे। कमरे में खिड़की नहीं थी। दोनों का नींद में ही दम घुट गया।