उधर, मामला हाईकोर्ट में पहुंचने व अदालत की कड़ी टिप्पणी कि क्या आप किसी के घर में धरना दे सकते हैं, के बाद सरकार को भी लगने लगा कि कहीं उनके खिलाफ निर्णय न आ जाए। सरकार ने बातचीत की पहल की। उधर अधिकारियों को भी लगा कि मामले में पक्ष बनने के बाद अदालत की किसी भी टिप्पणी से बचने के लिए सुलह जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन अधिकारियों से नहीं मिले और स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर अधिकारियों को उपमुख्यमंत्रियों से मिलने का तर्क रख दिया।मुख्यमंत्री ने बंगलूरू जाने से पहले कई मीटिंग कीं और आदेश दिए, लेकिन अधिकारियों से मिलने के लिए समय नहीं निकाला।
अधिकारियों में इस मुद्दे को लेकर रोष है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्थायी हल चाहते, तो अधिकारियों से कुछ घंटे की मीटिंग कर सकते थे, लेकिन उनके रवैये से वे निराश हैं और यही कारण है कि उनके एसोसिएशन ने उपमुख्यमंत्री से मिलने से इनकार कर दिया।
उनका मानना है कि यदि मुख्यमंत्री उनसे एक बार मिल लेते, तो वे बाद में उपमुख्यमंत्री से भी बात कर विवाद का निपटारा कर सकते थे।