मध्य जिला पुलिस उपायुक्त श्वेता चौहान ने बताया कि 22 अक्तूबर को करोल बाग थाना पुलिस को राजगढ़, गांधी नगर निवासी व्यक्ति एक भागीरथ ने अपने बेटे के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि बेटे मनीष का करोल बाग इलाके में मोबाइल एक्सेसरीज का कारोबार है। 21 अक्तूबर की रात से वह गायब है। उसकी कार पुलिस चौकी धौलाकुंआ एरिया में लावारिस खड़ी मिली है। इसके अलावा कार की सीट पर खून भी लगा मिला है। फौरन पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। थाना प्रभारी दीपक कुमार मलिक, एसआई विक्रम सिंह, हवलदार मनोज कुमार व अन्यों की टीम ने मनीष के मोबाइल कॉल डिटेल की पड़ताल की। जांच में पता चला कि मनीष के साथ लगातार चूरू निवासी उसके दो दोस्त संजय और सीताराम बात कर रहे थे। पुलिस ने दोनों की मोबाइल कॉल डिटेल का पता किया तो मनीष के गायब होने वाले दिन उनकी लोकेशन दिल्ली की मिली। एक टीम को फौरन राजस्थान के चूरू भेजा गया। वहां से दोनों को हिरासत में ले लिया गया।
शुरुआत में दोनों ने पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन बाद में वह टूट गया। आरोपी संजय ने बताया कि वह कोलकाता में एक शेयर ब्रोकर के पास कंप्यूटर असिस्टेंट का काम करता था। वहां उसकी गर्लफ्रेंड ने उसकी मुलाकात मनीष से कराई। इस बीच मनीष ने संजय की गर्लफ्रेंड से नजदीकियां बढ़ा लीं। इस बात पर गुस्से में संजय ने मनीष की हत्या की योजना बना ली। 21 अक्तूबर को वह अपने बचपन के दोस्त सीताराम के साथ दिल्ली करोलबाग पहुंचा। यहां मिलने के बहाने उसे मनीष को बुलाया। बाद में सभी ने गाड़ी में शराब पी। संजय ने मनीष से गर्लफ्रेंड के फोटो और कांटेक्ट डिलीट करने के लिए कहा, मना करने पर दोनों ने रस्सी से उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। बाद में शव को ठिकाने लगाने के लिए वह दिल्ली की सड़कों पर चक्कर काटते रहे। रास्ते में उसका मोबाइल तोड़कर एक मकान की बालकनी में फेंक दिया गया।
दीपावली की वजह से शव ठिकाने लगाने में हुई दिक्कत...
संजय ने बताया कि मनीष की हत्या के बाद उन्होंने शव को कार की पिछली सीट पर डाल दिया। इसके बाद वह उसे ठिकाने लगाने का स्थान ढूंढने लगे। लेकिन दीपावली होने की वजह से जगह-जगह रोशनी थी। वह कार चलाते हुए दिल्ली कैंट एरिया में आर्मी हेडक्वार्टर के नजदीक पहुंचे। यहां शव को एक सीवर के मेनहोल में डाल दिया गया। इससे पूर्व उसके पर्स से 20 हजार रुपये भी निकाल लिए। बाद में उसके पर्स और जूतों को उसी मैन हॉल में डाल दिया गया।
गूगल मैपिंग की मदद से शव बरामद
पुलिस ने संजय और सीताराम को गिरफ्तार कर लिया। शव के बारे में पूछने पर आरोपियों ने बताया कि उनको नहीं पता कि इन लोगों ने शव को कहां ठिकाने लगाया है। अंधेरे में वह यहां-वहां गाड़ी चलाते गए। दिल्ली कैंट के पास इन लोगों ने शव को ठिकाने लगाने की बात की। पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल की गूगल मैपिंग का पता किया। लोकेशन के आधार पर पुलिस आर्मी हेडक्वार्टर के उस मेनहोल के पास पहुंच गई, जहां शव ठिकाने लगाया गया था। बाद में शव को बरामद कर लिया गया।