नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पेड़ों की बिना अनुमति छंटाई और कटाई के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए वन विभाग को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेड़ जीवित इकाइयां हैं और उनकी अंधाधुंध छंटाई या कटाई से दिल्ली की हरियाली और पर्यावरण को गंभीर खतरा है। अदालत ने कहा पर्यावरण से जुड़े इस मामले में जारी निर्देशों का पालन जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने वन विभाग, नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) सहित अन्य संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी की है। इन सभी से कोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने को कहा कि वे छंटाई की प्रक्रिया को कैसे नियंत्रित और निगरानी करते हैं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि एसओपी का यह क्लॉज पुराने फैसले को दरकिनार कर रहा है, जिससे पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई/छंटाई को वैधता मिल सकती है। एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान वन विभाग को आदेश दिया कि वह लंबित शिकायतों का तुरंत निस्तारण करे और 2025 में जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रिया (एसओपी) के उस प्रावधान की वैधता पर स्पष्टीकरण दे, जिसमें 15.7 सेमी से कम परिधि वाली शाखाओं की बिना पूर्व अनुमति के छंटाई की छूट दी गई है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 के मध्य तक निर्धारित की है, जब तक सभी पक्षकार अपने जवाब दाखिल करेंगे।
जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान 2023 के प्रो. डॉ. संजीव बागई बनाम पर्यावरण विभाग मामले में दिए गए फैसले के विपरीत प्रतीत होता है। उस फैसले में हाईकोर्ट ने ऐसी ही गाइडलाइंस को खारिज कर दिया था, जिसमें 15.7 सेमी की परिधि वाली शाखाओं की बिना ट्री ऑफिसर की अनुमति के छंटाई की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने तब कहा था कि दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ ट्रीज एक्ट (डीपीटीए) में ऐसी कोई छूट का प्रावधान नहीं है और यह नियम मनमाना व दुरुपयोग के लिए प्रवृत्त करने वाला है।