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दिल्ली की बनी रहेगी हरियाली, नहीं कटेंगे पेड़, डीटीयू ने शुरू किया ट्रांसप्लांट प्रोजेक्ट

Sun, 29 Sep 2019 02:45 AM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डीटीयू में ट्रांसप्लांट होता पेड़। - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) ने हरियाली को जिंदा रखने के लिए एक पहल की है। डीटीयू परिसर में निर्माण के लिए 15 से 20 वर्ष पुराने 111 पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। उन्हें परिसर में ही नए स्थानों ट्रांसप्लांट तकनीक के जरिए एक जगह से उखाड़कर दूसरी जगह लगाया जा रहा है। पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने में प्रति वृक्ष औसतन 6844 रुपये की लागत आएगी।
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इस पहल को देखने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शनिवार को विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने इसे सराहनीय कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में वृक्षों को आड़े नहीं आने दिया जाएगा, जहां जरूरत होगी वहां इस तकनीक पर विचार किया जाएगा। 

इस दौरान उन्होंने वृक्षों के  जमीन से निकालने से लेकर ढुलाई व नए स्थान पर रोपण तक का जायजा लिया। उन्होंने वृक्षों के ट्रांसप्लांट का जिम्मा संभाल रही कंपनी के अधिकारियों से भी जानकारी ली।
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ट्रांसप्लांट के ये है तकनीक

डीटीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बताया कि सबसे पहले छंटाई कर वृक्षों का भार कम किया जा रहा है। इसके बाद तने के आधार के पास जमीन में पर्याप्त परिधि व गहराई में मशीन से खुदाई की जा रही है। इसके बाद वृक्षों की जड़ों की मिट्टी को संभालते हैं। फिर जेसीबी हाईड्रा क्रेनों व ट्रकों की मदद से उस स्थान पर ले जाया जा रहा है जहां उन्हें रोपित करना है।

उस जगह पर पहले से ही व्यास व गहराई के गड्ढे किए होते हैं, और देसी खाद व केमिकल पेस्टिसाइड्स डाल दिया जाता है। वृक्षों को इन गड्ढों में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। विश्वविद्यालय ने वृक्षों के ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली वन विभाग से अनुमति ली है। इसके बाद ही रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर द्वारा वृक्षों पर नंबर भी लगाए गए हैं। ट्रांसप्लांट प्रक्रिया के लिए एक कंपनी को ठेका दिया गया है।

नए शैक्षणिक भवन व हॉस्टल के लिए चाहिए थी जमीन

दरअसल, कैंपस में नए शैक्षणिक भवन व छात्र-छात्राओं के हॉस्टल बनाने के लिए जमीन की जरूरत थी, लेकिन कैंपस में वृक्षों की संख्या अधिक है। इसलिए इस तकनीक का सहारा लिया गया। इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं हो रहा है। वहीं, सीवेज के पानी को भी साफ करके पार्कों की सिंचाई के लिए प्रयोग किया जा रहा हैै।

ये वृक्ष किए जा रहे ट्रांसप्लांट

प्रत्यारोपित किए जाने वाले कुल 111 वृक्षों में सर्वाधिक 46 वृक्ष कदम के हैं। कचनार के 10, नीम के 12, कनेर के 5, अलस्टोनिया के 2, पापड़ी के 14, जामुन के 15, शीशम का 1, अमलताश का 1, मचकन का 1, सर्फ (केसियाविफ्लोरा) का 1 आदि वृक्ष शामिल हैं।

ये है लागत

111 वृक्षों पर कुल अनुमानित 759700 लाख रुपये लागत आएगी। औसतन प्रति वृक्ष 68444 रुपये खर्च होंगे। 30 सेंटीमीटर तक के परिधि वाले 11 वृक्षों के लिए प्रति वृक्ष 2800 रुपये, 31 से 50 सेंटीमीटर तक की परिधि वाले 5 वृक्षों के लिए प्रति वृक्ष 5,000 रुपये, 51 से 125 सेंटीमीटर वाले 81 वृक्षों के लिए प्रति वृक्ष 7100 रुपये, और 126 से 200 सेंटीमीटर तक 14 वृक्षों के लिए प्रति वृक्ष 9200 रुपये लागत आएगी।
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