शहरवासियों को ट्रांसपोर्ट नगर की सौगात देने के लिए जीडीए ने तेजी से काम शुरू कर दिया है। राजनगर एक्सटेंशन और नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड (एनपीआर) के पास करीब 100 एकड़ एरिया में ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाएगा।
जीडीए अभियंत्रण अनुभाग ने ट्रांसपोर्ट नगर का ले-आउट तैयार कर लिया है। ट्रांसपोर्ट नगर में 45 एकड़ क्षेत्र में सड़क, सीवर, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), पार्क और हरित पट्टियां विकसित की जाएंगी।
ले-आउट में बाकी बचे 55 फीसदी क्षेत्र को जीडीए ही विकसित करेगा। लैंड पूल मॉडल की शर्तों के तहत प्राधिकरण 55 में से 25 फीसदी जमीन को विकसित कर किसानों को लौटाएगा।
प्राधिकरण के अभियंत्रण अनुभाग के ट्रांसपोर्ट नगर का ले-आउट बनाने के बाद अब विकास में आने वाली लागत का खाका जीडीए नियोजन अनुभाग तैयार करेगा। ट्रांसपोर्ट नगर के लिए जमीन देने के बाबत किसानों की सहमति मिलने के बाद योजना को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो जाएगी।
ट्रांसपोर्ट नगर के लिए जीडीए अधिकारियों की मोरटा, मोरटी व राजनगर एक्सटेंशन के आसपास के किसानों के साथ निजी विकासकर्ताओं ने बातचीत हो चुकी है। इनमें से कई किसान और निजी विकासकर्ता अपनी जमीन देने के लिए आगे आए हैं। ट्रांसपोर्ट नगर के लिए एनपीआर व जोनल रोड के पास के मोरटी, भोवापुर, मोरटा, सिकरोड़ के अलावा शाहपुर की भूमि चिह्नित की जा सकती है।
नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड के अलावा पास में ही ईस्टर्न पेरिफेरल-वे के गुजरने के चलते ही जीडीए की ओर से इस स्थान को ट्रांसपोर्ट नगर के लिए प्राथमिकता में रखा गया है। एनपीआर व ईस्टर्न पेरिफेरल-वे की वजह से ट्रकों के साथ भारी मालवाहक वाहन बगैर शहर में अंदर प्रवेश किए ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचने के साथ अन्य गंतव्य की ओर जा सकेंगे।
तीन माह के नोटिस के अंदर ट्रांसपोर्टरों को करना होगा शिफ्ट
जीडीए अधिकारियों की मानें तो ट्रांसपोर्ट नगर का विकास होने के बाद जीडीए ट्रांसपोर्टरों को तीन माह का नोटिस जारी करेगा। इस समयसीमा के अंदर ट्रांसपोर्टरों को शिफ्ट करना होगा। महानगर के आठ औद्योगिक क्षेत्र के सैकड़ों की संख्या में ट्रक शहर से गुजरते हैं। ट्रांसपोर्ट नगर नहीं होने से अधिकांश वाहन सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं, जो कि जाम का सबब बनता है। ट्रांसपोर्ट नगर बनने से शहर में जाम के झाम को खत्म करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर दिल्ली-मेरठ हाइवे, एनपीआर व ईस्टर्न पेरिफेरल-वे से सटी साइट होने से ट्रांसपोर्ट नगर का विस्तृत रूप से लाभ मिलेगा।
ट्रांसपोर्ट नगर का ले-आउट तैयार किया गया है। इसमें 45 फीसदी क्षेत्र में सड़क, सीवरेज सहित पब्लिक यूटिलिटी विकसित होंगी। लैंड पूल पॉलिसी के तहत 25 फीसदी क्षेत्र को विकसित कर किसानों को लौटाया जाएगा।
- विवेकानंद सिंह, मुख्य अभियंता, जीडीए