दिल्ली से हरियाणा के सोनीपत, पानीपत और करनाल तक तेज रफ्तार रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने दिल्ली-करनाल नमो भारत कॉरिडोर के लिए विस्तृत डिजाइन सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत एलिवेटेड ट्रैक, स्टेशन, डिपो और संपत्ति विकास से जुड़े कार्यों की विस्तृत योजना तैयार की जाएगी। करीब 136 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के पूरा होने पर दिल्ली से करनाल तक का सफर मौजूदा साढ़े तीन से चार घंटे के बजाय करीब 90 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
ट्रैक, स्टेशन और डिपो का तैयार होगा डिजाइन
परियोजना के तहत सिविल निर्माण, वास्तुकला और बिजली एवं यांत्रिक व्यवस्थाओं से संबंधित विस्तृत डिजाइन तैयार कराए जाएंगे। इसमें जमीन से ऊपर बनने वाले रेल मार्ग, स्टेशनों की संरचना और ट्रेनों के रखरखाव के लिए डिपो की योजना शामिल होगी। डिजाइन के दौरान यात्रियों की आवाजाही, स्टेशन परिसर की व्यवस्था और रेल संचालन से जुड़ी आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा। इसके अलावा कॉरिडोर के आसपास निर्धारित संपत्ति विकास क्षेत्रों की योजना भी तैयार की जाएगी, ताकि परिवहन सुविधाओं के साथ संबंधित क्षेत्रों का व्यवस्थित विकास किया जा सके।
मिट्टी की जांच और अन्य शुरुआती काम जारी
डिजाइन सलाहकार की नियुक्ति की प्रक्रिया के साथ परियोजना से जुड़ी शुरुआती गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं। इनमें भू-तकनीकी जांच और मिट्टी का परीक्षण प्रमुख हैं। इन जांचों से प्रस्तावित रेल मार्ग पर जमीन की स्थिति का आकलन करने और निर्माण से जुड़ी तकनीकी जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त गैस पाइपलाइन सहित अन्य उपयोगी सेवाओं की लाइनों को आवश्यकता के अनुसार स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। इन गतिविधियों से आगे निर्माण कार्य की योजना बनाने और संभावित बाधाओं की पहचान करने में सहायता मिलेगी।
सराय काले खां से हरियाणा तक जुड़ेंगे प्रमुख शहर
प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर हरियाणा के प्रमुख शहरों तक पहुंचेगा। इसके मार्ग में सोनीपत, पानीपत और करनाल शामिल होंगे। पूरे कॉरिडोर पर कुल 17 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें 11 स्टेशन हरियाणा में बनाए जाने की योजना है। इस रेल संपर्क से दिल्ली और हरियाणा के बीच यात्रियों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। हालांकि, स्टेशनों के नाम, उनके बीच की दूरी और इंटरचेंज की विस्तृत व्यवस्था से संबंधित अंतिम जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
चार साल में पूरा होगा डिजाइन संबंधी कार्य
परियोजना के डिजाइन संबंधी कार्य के लिए चार साल की अवधि निर्धारित की गई है। कॉरिडोर को अन्य परिवहन साधनों से जोड़ने की भी योजना है। इसके तहत कश्मीरी गेट सहित प्रमुख स्थानों पर दिल्ली मेट्रो के साथ संपर्क सुविधा विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इससे यात्रियों को एक परिवहन साधन से दूसरे तक पहुंचने में आसानी होगी।
हजारों यात्रियों को मिलेगी राहत
दिल्ली और हरियाणा के बीच प्रतिदिन नौकरी, कारोबार, शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए हजारों लोग यात्रा करते हैं। सड़क मार्ग पर बढ़ता यातायात और जाम उनके लिए परेशानी का कारण बनता है। ऐसे में नमो भारत कॉरिडोर के विकसित होने से यात्रियों को तेज आवागमन का विकल्प मिल सकेगा। इससे यात्रा समय में कमी आने के साथ दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर होने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।