नहरपार किसान संघर्ष समिति ग्रेटर फरीदाबाद के प्रतिनिधियों ने रविवार शाम सेक्टर 12 हुडा कंवेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की। किसानों ने ग्रेटर फरीदाबाद के लिए अधिग्रहित हुई जमीन का मामला सुलझाने की मांग इस दौरान उठाई।
समिति के अध्यक्ष शिवदत्त वशिष्ठ ने किसानों की जमीन अधिग्रहण के संबंध में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नहरपार किसानों की जमीन का बिना किसानों की रजामंदी के अधिग्रहण किया गया था, जिसके विरोध में नहरपार के किसानों ने काफी समय तक संघर्ष चलाया किया।
लेकिन तत्कालीन सरकार ने किसानों की किसी भी बात को नहीं सुना। उन्होंने कहा कि सेक्टर-75 व 80 के पांच गांवों की कुल 650 एकड़ जमीन पिछले आठ वर्ष पूर्व अधिग्रहित की गई थी जिसमें से 300 एकड़ जमीन तत्कालीन सरकार ने मोटे मुनाफे पर बिल्डरों को बेच दी थी।
350 एकड़ जमीन टुकड़ों में पड़ी हुई है जिसका अधिग्रहण कानून के तहत नहीं किया जा सकता। किसान लैंड पुलिंग स्कीम के तहत अपने शपथ पत्र जमा कर चुके हैं लेकिन अभी तक नहरपार के किसानों को लैंड पुलिंग स्कीम के प्रावधान के अनुसार एक एकड़ जमीन पर एक हजार वर्गगज का रिहायशी प्लॉट और 100 वर्गगज का कॉर्मर्शियल प्लॉट नहीं मिला है।
उन्होंने मास्टर रोड व आईएमट़ीम़ें अधिग्रहित जमीन का मुआवजा मिलने में देरी के बारे में भी सीएम को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसान की बिना मर्जी के कोई नया अधिग्रहण नहीं करेगी। जबरन अधिग्रहण की समस्या पिछली कांग्रेस सरकार की देन है इस समस्या का भी हम जल्द से जल्द निवारण कर देंगे।