ठंड की ठिठुरन के साथ ही घने कोहरे ने रेल यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले 15 दिनों से रेलवे की समय सारणी बिगड़ी हुई है। रेलगाड़ियों की रफ्तार इन दिनों बैलगाड़ी की तरह बनी हुई है। इनके लगातार देरी से चलने की वजह से यात्रियों की मुसीबत बढ़ी हुई है। न केवल यात्रा के दौरान बल्कि प्लेटफार्म पर भी अपनी रेलगाड़ी के इंतजार में उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। कोहरे के आगे रेलवे की तमाम तरह की तैयारियां भी बौनी साबित हो रही हैं।
भारतीय रेलवे ने सर्दी के मौसम में कोहरे के कारण रेलगाड़ियों के देरी से चलने की समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए, जो विफल साबित हुए हैं। यह निर्णय लिया गया कि रेल इंजन में कोहरे से बचने के उपकरणों के उपयोग से कोहरे व खराब मौसम की स्थिति के दौरान अधिकतम अनुमेय गति को 60 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़ाकर 75 किलोमीटर प्रति घंटा किया जाए।
कोहरे के मौसम में लोको पायलट सभी सावधानियों का पालन करें। कोहरे के दौरान ट्रेनों का संचालन लोको पायलट के विवेक पर छोड़ दिया गया था। मसलन यदि वह कोहरे के कारण दृष्यता कम महसूस करता है तो वह निर्धारित गति से कम या ज्यादा रफ्तार से ट्रेन चला सकता है। साथ ही यह निर्देश भी दिया गया कि यह गति किसी भी स्थिति में 75 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक न हो।
घंटों देरी से चलने वाली कुछ प्रमुख ट्रेनें
-लखनऊ-नई दिल्ली मेल-2:30 घंटा
-पुरुषोत्तम एक्सप्रेस-पांच घंटे
-महाबोधि-पांच घंटे
-बरौनी-नई दिल्ली क्लोन-4:30 घंटा
-बिहार संपर्क क्रांति-पांच घंटा
-काशी विश्वनाथ-चार घंटा
-पूर्वा एक्सप्रेस-पांच घंटा
-रीवा एक्सप्रेस-छह घंटा
-पद्मावत एक्सप्रेस-पांच घंटा
-छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस-छह घंटा
-काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस-चार घंटा
-ब्रह्मपुत्र मेल-छह घंटा.
-कैफियात एक्सप्रेस-छह घंटा
-संपूर्ण क्रांति-तीन घंटा