दिल्ली के प्रगति मैदान में लगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला केवल उत्पादों का ही नहीं, बल्कि कला का भी कुंभ है। यहां बने एंफीथिएटर में रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी।
अब तक हुई प्रस्तुतियों में फोकस राज्य झारखंड समेत अन्य राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से सभी को भाव विभोर दिया है। उनसे पहले अर्चना, सुहाना की कविताओं ने और जतिंदर सिंह बब्बर की जादूगरी ने मंच पर छटा बिखेरे रखी। आने वाले दिनों के कार्यक्रमों में पंजाब के सूरिंदर सागर द्वारा पंजाबी गायन, झारखंड की डॉ. अनु सिन्हा द्वारा कथक नृत्य, हरियाणा के जतिंदर सिंह बब्बर द्वारा जादू शो, राजस्थान व उत्तर प्रदेश के कलाकारों का कथक नृत्य, मध्य प्रदेश, मणिपुर, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, दिल्ली, ओडिशा, असम, जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब समेत अन्य दूसरे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के कलाकारों द्वारा विभिन्न प्रस्तुतियां दी जाएंगी। कार्यक्रमों का आयोजन रोजाना दो सत्रों में किया जाएगा, जिनमें से एक दोपहर तीन बजे से 4:30 बजे तक और दूसरा शाम छह बजे से 7:30 बजे तक होगा।
राज्यों के पवेलियन में भी है धूम
एंफीथिएटर के अलावा प्रगति मैदान स्थित सभी पवेलियन में कलाकारों ने दर्शकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। शुक्रवार दोपहर जब पंजाब पवेलियन में लोग शॉपिंग करने पहुंचे, तब अचानक ढोल व अन्य पंजाबी वाद्यों के साथ कुछ कलाकार वहां आ गए। जैसे ही उन्होंने ढोल पर पंजाबी लोकगीत गाने शुरू किए, लोग अपनी शॉपिंग छोड़कर कलाकारों के साथ भांगड़ा करने पहुंच गए। लोग पंजाबी गीतों पर खूब झूमे। इसी तरह उत्तराखंड पवेलियन में लोगों ने पिथौरागढ़ जिले के लोक नृत्य छलिया का लुत्फ उठाया।
झारखंड और राजस्थान की कला का फ्यूजन मोह रहा मन
नई दिल्ली। ट्रेड फेयर में झारखंड पवेलियन में एक युवा ने झारखंड और राजस्थान की कला का अद्भुत फ्यूजन कर एक अनोखा स्टार्टअप शुरू किया है। जमशेदपुर के धीरज जैन ने झारखंड के पारंपरिक आभूषणों को राजस्थानी कला के साथ मिलाकर नए अंदाज में ट्रेंडी बना दिया है। धीरज ने बताया कि उन्होंने 2016 में यह स्टार्टअप शुरू किया था। उन्होंने डिजाइनिंग से लेकर ज्वेलरी को जोड़ने का काम खुद किया है। वह सीप पर पेंटिंग और मोती स्टोन का प्रयोग करते हुए एक पीस चार घंटे में बनाते हैं। उनकी मां भी उनके साथ काम करती हैं। उन्होंने बताया कि वह ज्वेलरी पर राजस्थान की कला की पेंटिंग करते हैं और अपनी कला के जरिए कण के बुंदे, गले का हार, अंगूठी व ब्रेसलेट तैयार करते हैं। यह स्टार्टअप अब बिजनेस का रूप लेने लगा है और धीरज बताते है कि उनको अब अन्य शहरों से भी बड़े ऑर्डर मिलने लगे हैं।