फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक माह में आसमान से होगा दिल्ली का दीदार, सिग्नेचर ब्रिज के टॉप पर बन रहा टूरिस्ट प्वाइंट

Sun, 02 Jun 2019 03:58 AM IST
राजेश सैनी अरुण कुमार, नई दिल्ली

सार

-अंतिम पड़ाव में है ब्रिज के टॉप पर बन रहे 154 मीटर ऊंचे टूरिस्ट प्वाइंट का निर्माण
-सूर्योदय-सूर्यास्त भी आएगा नजर, पायलोन केबल से बने ब्रिज के टॉप पर लगाई जा रही है शीशे की दीवार
विज्ञापन
सिग्नेचर ब्रिज (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी में यमुना पर 1518 करोड़ की लागत से बनाए गए सिग्नेचर ब्रिज के टॉप पर बनाया जा रहा टूरिस्ट प्वाइंट एक महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। 154 मीटर की ऊंचाई पर बन रहे टूरिस्ट प्वाइंट से पर्यटक सूर्योदय-सूर्यास्त सहित पूरी दिल्ली का दीदार कर सकेंगे।

विज्ञापन


करीब 14 सालों के लंबे इंतजार के बाद दिल्लीवासियों को 4 नवंबर 2018 को सिग्नेचर ब्रिज का तोहफा मिला था। ब्रिज के टॉप पर बने पायलोन की ऊंचाई 154 मीटर यानी कुतुब मीनार से भी दोगुनी है। पायलोन केबल द्वारा बेहद आकर्षक डिजाइन तैयार किया गया है, जिसे देखने लोग अभी भी ब्रिज पर पहुंचते हैं।

ब्रिज के टॉप पर पर्यटकों के लिए टूरिस्ट प्वाइंट बनाने का कार्य जारी है। इसे जनवरी 2019 में पयर्टकों के लिए खोला जाना था। इसके तैयार होने की एक और समयसीमा निकल चुकी है। उम्मीद है, करीब एक माह में लोग इससे पूरी दिल्ली का दीदार कर पाएंगे। ब्रिज के टॉप पर 25 मीटर की मीनार बनाई जा रही है, जिसके चारों ओर शीशे की दीवार बनाई जा रहीं हैं। टॉप पर पहुंचने वाले पर्यटक शीशे की दीवार के भीतर रहेंगे। 
विज्ञापन


खाने-पीने की भी होगी व्यवस्था
टूरिस्ट प्वाइंट की एक ओर खासियत यह होगी कि यहां पर पर्यटकों के लिए सूर्योदय और सूर्यास्त देखने का भी मौका मिलेगा। यहां पहुंचने वाले लोगों को ब्रिज के टॉप पर पहुंचाने के लिए बेहतर और सुरक्षित लिफ्ट बनाई गई है। इसके जरिये 50 से 60 लोगों को एक साथ टॉप पर पहुंचाया जाएगा। टूरिस्ट प्वाइंट पर खाने-पीने की भी व्यवस्था होगी। सिग्नेचर ब्रिज बाहरी दिल्ली को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर को जोड़ता है।

बढ़ती गई निर्माण की समय सीमा
उल्लेखनीय है कि 35.2 मीटर चौड़े सिग्नेचर ब्रिज के प्रोजेक्ट को 2007 में दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। 2010  के कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले निर्माण पूरा होना था। बाद में समय सीमा 2013 तक बढ़ा दी गई। काम पूरा नहीं हुआ तो समय सीमा जून 2016 तक बढ़ाई गई। इसके बाद जुलाई 2017 तक डेडलाइन बढ़ाई गई, लेकिन काम फिर भी पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद केजरीवाल सरकार ने नई डेडलाइन मार्च 2018 निर्धारित की, जिसे पहले अप्रैल तक खिसकाया गया था और फिर समय सीमा अक्तूबर तक आगे बढ़ा दी गई। प्रोजेक्ट में हुई देरी के साथ इसकी लागत भी बढ़ती गई। शुरूआत में ब्रिज के निर्माण में 887 करोड़ की लागत का अनुमान था, लेकिन अंत तक 1,518.37 करोड़ की लागत आई। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें