इन कैमरों का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अगर कोई वाहन चालक ओवर स्पीड और बिना सीट बेल्ट के चलता मिला तो टोल के साथ ऑनलाइन चालान भी कटा कट जाएगा। चालान की धनराशि तत्काल खाते से कट जाएगी। खाते में चालान धनराशि न होने की स्थिति में ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग की मदद से चालान कट कर घर पहुंच जाएगा।
एएनपीआर कैमरे लगाने की स्वीकृति
दूरी के हिसाब से टोल वसूले जाने के लिए एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर) कैमरे लगाए जाने की स्वीकृति मिल गई है। यह कैमरे फास्टैग को स्कैन करने वाले कैमरों की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस हैं। इन कैमरों की मदद से नंबरप्लेट को स्कैन किया जाएगा और फिर फास्टैग की तर्ज पर खाते से टोल धनराशि कट जाएगी।
डासना से हापुड़ के बीच लागू करना संभव नहीं
एनएचएआई ने कहा कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के तीसरे चरण में डासना से हापुड़ के बीच इस व्यवस्था को लागू करना संभव नहीं है। 22 किलोमीटर की इस चरण में बड़ी संख्या में एंट्री व एग्जिट प्वाइंट हैं, जिन्हें तकनीकी रुप से कवर नहीं किया जा सकता। तीसरा चरण एक्सप्रेस-वे का पार्ट है लेकिन वास्तव में यह हिस्सा सिर्फ नेशनल हाईवे ही है।
मार्च 2021 तक मेरठ तक होगा लागू
दूरी के हिसाब से टोल वसूलने की प्रक्रिया भले ही पहले चरण में नवंबर से शुरू होगी लेकिन वास्तविक तौर पर पूरे एक्सप्रेस को मार्च 2021 तक ही कैमरों से लैस किया जा सकेगा। क्योंकि दूसरे और चौथे चरण का काम अभी काफी पीछे है। दूसरे चरण का काम दिसंबर 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है लेकिन चौथे चरण में डासना से मेरठ के बीच का काम मार्च 2021 तक ही पूरा हो सकेगा। हालांकि एनएचएआईदोनों ही चरण का काम दिसंबर तक पूरा होने का दावा कर रही है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर दूरी के हिसाब से टोल वसूलने का रास्ता साफ हो गया है। अब नंबर से पहले चरण में सराय काले खां से यूपी गेट के बीच कैमरे लगाकर टोल वसूली शुरू हो जाएगी। उसके बाद मेरठ तक इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
- मुदित गर्ग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई