फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर दूरी के हिसाब से देना होगा टोल, हाईब्रिड कैमरों से होगी निगरानी

Fri, 28 Aug 2020 06:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण चट्ठा, गाजियाबाद

सार

  • दिल्ली से मेरठ के बीच छह जगह होंगे प्रवेश-निकासी प्वाइंट, चलती गाड़ी से कट जाएगा टोल 
  • पहले चरण में नवंबर से सराय काले खां से यूपी गेट के बीच शुरू होगी टोल वसूली की प्रक्रिया
विज्ञापन
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर दूरी के हिसाब से टोल देना होगा। यानी आप जितना सफर करेंगे, उतनी ही दूरी का टोल अदा करना होगा। दूरी के हिसाब से टोल वसूलने संबंधी प्रस्ताव को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय ने स्वीकृति दे दी है। 

विज्ञापन


पहले चरण में सराय काले खां से यूपी गेट के बीच नवंबर से टोल वसूलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके लिए विशेष किस्म के हाईब्रिड कैमरे लगाए जाएंगे। उसके बाद यूपी गेट से डासना और फिर मेरठ (परतापुर) तक दूरी के हिसाब से टोल वसूलने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि हापुड़ की तरफ जाने वाले वाहनों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। उन्हें मौजूदा दरों के हिसाब से ही टोल अदा करना होगा।   
   
लंबे समय से मांग उठ रही थी कि अगर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर किसी व्यक्ति को गाजियाबाद से मेरठ या मोदीनगर तक ही जाना है तो फिर ऐसे लोग पूरे एक्सप्रेस-वे का टोल क्यों भरें। जैसा कि अभी हापुड़ की तरफ जाने वाले वाहनों के साथ हो रहा है। उनसे एक तरफ का 125 रुपये टोल लिया जा रहा है। इसको लेकर काफी लंबी चौड़ी बहस भी छिड़ रही थी कि यह स्थानीय लोगों के साथ नाइंसाफी है। 
विज्ञापन


एनएचएआई को पूरा टोल उन्हीं वाहनों से लेना चाहिए जो पूरे एक्सप्रेस-वे का सफर करते हैं। इसी पर एनएचएआई ने बीते वर्ष प्रस्ताव तैयार किया था कि फास्टैग की तर्ज पर दूरी के हिसाब से टोल वसूलने की इजाजत दी जाए। क्योंकि भविष्य में ये स्थानीय लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है। आखिर बिना मतलब पूरे हाईवे पर सफर करना का भार स्थानीय लोगों पर क्यों डाला जा रहा है। इसको लेकर तकनीकी और वित्तीय मामलों की कमेटी ने भी अपनी स्वीकृति दी थी। जिसके बाद एनएचएआई ने दूरी के हिसाब से टोल वसूलने संबंधी प्रस्ताव को लागू करने का फैसला लिया है।

दिल्ली से मेरठ तक होंगे छह प्रवेश और निकासी प्वाइंट 
पूरे एक्सप्रेस-वे (बीच की छह लेन) पर छह ही स्थानों पर वाहनों को चढ़ने और उतने की इजाजत होगी। इनमें सराय काले खां, अक्षरधाम, एबीईएस कट, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे, भोजपुर और उसके बाद परतापुर शामिल है। इन सभी पर फास्टैग की तर्ज पर नंबर प्लेट स्कैन करने वाले कैमरे लगाए जाएंगे, जो चलती हुई गाड़ी से ही एंट्री प्वाइंट को स्कैन कर लेंगे। उसके बाद जिस जगह से आप निकलेंगे, वहां पर लगा कैमरा एग्जिट प्वाइंट स्कैन कर सर्वर को दे देगा। उसके बाद फास्टैग की तर्ज पर खाते से दूरी के हिसाब से टोल शुल्क कट जाएगा। हालांकि सराय काले खां से लेकर दूसरे चरण में डासना तक सर्विस रोड की लाइन पर चलने पर कोई टोल अदा नहीं करना पड़ेगा।  

विज्ञापन

ओवर स्पीड पर साथ में कटा मिलेगा चालान भी 

इन कैमरों का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अगर कोई वाहन चालक ओवर स्पीड और बिना सीट बेल्ट के चलता मिला तो टोल के साथ ऑनलाइन चालान भी कटा कट जाएगा। चालान की धनराशि तत्काल खाते से कट जाएगी। खाते में चालान धनराशि न होने की स्थिति में ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग की मदद से चालान कट कर घर पहुंच जाएगा। 

एएनपीआर कैमरे लगाने की स्वीकृति
 दूरी के हिसाब से टोल वसूले जाने के लिए एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर) कैमरे लगाए जाने की स्वीकृति मिल गई है। यह कैमरे फास्टैग को स्कैन करने वाले कैमरों की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस हैं। इन कैमरों की मदद से नंबरप्लेट को स्कैन किया जाएगा और फिर फास्टैग की तर्ज पर खाते से टोल धनराशि कट जाएगी।

 डासना से हापुड़ के बीच लागू करना संभव नहीं
एनएचएआई ने कहा कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के तीसरे चरण में डासना से हापुड़ के बीच इस व्यवस्था को लागू करना संभव नहीं है। 22 किलोमीटर की इस चरण में बड़ी संख्या में एंट्री व एग्जिट प्वाइंट हैं, जिन्हें तकनीकी रुप से कवर नहीं किया जा सकता। तीसरा चरण एक्सप्रेस-वे का पार्ट है लेकिन वास्तव में यह हिस्सा सिर्फ नेशनल हाईवे ही है।  

मार्च 2021 तक मेरठ तक होगा लागू 
दूरी के हिसाब से टोल वसूलने की प्रक्रिया भले ही पहले चरण में नवंबर से शुरू होगी लेकिन वास्तविक तौर पर पूरे एक्सप्रेस को मार्च 2021 तक ही कैमरों से लैस किया जा सकेगा। क्योंकि दूसरे और चौथे चरण का काम अभी काफी पीछे है। दूसरे चरण का काम दिसंबर 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है लेकिन चौथे चरण में डासना से मेरठ के बीच का काम मार्च 2021 तक ही पूरा हो सकेगा। हालांकि एनएचएआईदोनों ही चरण का काम दिसंबर तक पूरा होने का दावा कर रही है। 

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर दूरी के हिसाब से टोल वसूलने का रास्ता साफ हो गया है। अब नंबर से पहले चरण में सराय काले खां से यूपी गेट के बीच कैमरे लगाकर टोल वसूली शुरू हो जाएगी। उसके बाद मेरठ तक इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
- मुदित गर्ग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें