हर साल मजदूर दिवस आता है और चला जाता है। लेकिन मजदूरों के हालात वैसे के वैसे ही हैं। मजदूरों के हालात सुधारने के लिए सरकार ने श्रम कल्याण बोर्ड की स्थापना तो की है, लेकिन विभाग की ओर से मजदूरों के हित में कोई भी कार्य नहीं किया जा रहा है।यही कारण है कि आज भी कंपनियों में श्रमिकों का शोषण हो रहा है और अधिकारी हाथ पर हाथ रखे सब देख रहे हैं। उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में फैक्ट्री और कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले मजदूरों की संख्या लाखों में हैं। ये सभी मजदूर दूसरे राज्यों से आकर यहां मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं।
श्रम कल्याण बोर्ड के मुताबिक, शहर में कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले मजदूरों की संख्या करीब 1.5 से 2 लाख के बीच में है, लेकिन विभाग में रजिस्टर्ड मजदूरों की संख्या महज 45 हजार है। इसी प्रकार फैक्ट्री विंग में भी लाखों की संख्या में मजदूर काम करते हैं, लेकिन यहां भी फैक्ट्री के रजिस्टेशन के आधार पर करीब 60 हजार मजदूर काम करते हैं।
फैक्ट्रियां और कंपनियां कर रहीं शोषण
मजदूर आज भी फैक्ट्रियों और कंपनियों में न्यूनतम वेतन पर काम कर रहे हैं। कंपनियां और फैक्ट्रियां उनका शोषण कर रही हैं। कोई मजदूर 5 हजार तो कोई 65 सौ रुपये में काम कर रहा है। मजदूरों को ये रेट कलेक्टर रेट से भी कम दिया जा रहा है। कंपनियों और फैक्ट्रियों की ओर से मजदूरों को कोई सुविधा भी नहीं दी जा रही है।
श्रम कल्याण बोर्ड को भी नहीं चिंता
मजदूरों के हित के लिए सरकार ने श्रम कल्याण बोर्ड की स्थापना की है। लेकिन ये बोर्ड की ओर से मजदूरों को कोई सुविधाएं नहीं दी जा रही है। सरकार की ओर से मजदूरों के लिए कई योजनाएं चलाई जाती है। लेकिन कम ही मजदूरों को इन योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है। श्रम कल्याण बोर्ड में 45000 हजार मजदूरों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा रखा है। लेकिन बोर्ड की ओर से सिर्फ 5-6 हजार मजदूरों को ही योजना का लाभ मिल रहा है।
मजदूरों के लिए नहीं कोई सुविधाएं
आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र चावला ने कहा कि फरीदाबाद एक औद्योगिक शहर है। यहां लाखों मजदूर फैक्ट्री और भवन निर्माण का काम करते हैं। लेकिन इन्हें सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के लिए कोई भी फूड कोर्ट नहीं है, जहां पर सस्ता और अच्छा खाना खा सकें। फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर खुले में शौच के लिए जाते हैं। जिससे सरकार के स्वच्छ भारत मिशन पर धब्बा लग रहा है।