बृहस्पतिवार को राजधानी के घर-घर से गणपति बप्पा की विदाई होगी। 2 सिंतबर को मूर्ति स्थापना के बाद कहीं तीन तो कहीं आठ दिन बाद विसर्जन शुरू हो चुका था। यमुना में विसर्जन पर पाबंदी होने के कारण कृत्रिम तालाबों में ही बप्पा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
बुधवार देर शाम राजधानी के विभिन्न पांडालों और मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम हुए। उधर, पूर्वी दिल्ली के डीडीए मैदान पर बीते 2 सितंबर से स्थापित दिल्ली के महाराजा का विसर्जन भी धूमधाम से होगा। ढोल-नगाड़ों के बीच यमुना किनारे कृत्रिम तालाबों तक भक्त नाचते-गाते दिल्ली के महाराजा की शोभायात्रा लेकर जाएंगे।
गुलाल के साथ होली खेलते हुए भक्त हर वर्ष विसर्जन के लिए निकलते हैं। इसके लिए पुलिस सुरक्षा और कृत्रिम तालाबों पर व्यवस्थाएं भी और मजबूत कर दी गई हैं। दिल्ली के महाराजा के आयोजक मंडल के अनुसार, विसर्जन के लिए उन्होंने खास आयोजन रखा है। ढोल-नगाड़ों के अलावा महाराष्ट्र से बैंड ग्रुप भी शामिल होगा। इतना ही नहीं, गुलाल के साथ होली कार्यक्रम भी आयोजित होगा।