राजधानी में व्यवसायिक परिसरों को सील करने की कार्रवाई शुरू होने पर दक्षिण दिल्ली नगर निगम की महापौर एवं अन्य नेताओं की नींद उड़ गई है।
उन्होंने सीलिंग कार्रवाई बंद कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कमेटी से आग्रह किया। इसके अलावा केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन दोनों जगह से कोई राहत नहीं मिली।
महापौर कमलजीत सहरावत, स्थायी समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता और नेता सदन शिखा राय ने बुधवार सुबह सीलिंग कार्रवाई के संबंध में निगरानी कमेटी के सदस्यों से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने सीलिंग रोकने का आग्रह किया और व्यापारियों को कन्वर्जन चार्ज जमा कराने के लिए कुछ समय देने की मांग की, लेकिन कमेटी के सदस्यों ने उनका आग्रह स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने जानबूझकर कन्वर्जन चार्ज जमा नहीं कराया। उन्हें मालूम है कि मास्टर प्लान के तहत प्रतिवर्ष कन्वर्जन चार्ज जमा कराना आवश्यक है।
निगरानी कमेटी से टका सा जवाब मिलने के बाद देर शाम को उन्होंने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की। उन्होंने उनसे सीलिंग कार्रवाई रोकने के लिए अध्यादेश लाने का आग्रह किया। इसके अलावा व्यापारियों को सीलिंग कार्रवाई से बचाने के लिए मास्टर प्लान में संशोधन करने का भी सुझाव दिया।
भाजपा पार्षदों ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि सीलिंग कार्रवाई आरंभ होने से पार्टी की किरकिरी हो रही है, क्योंकि करीब 10 साल पहले पार्टी ने सीलिंग एवं तोड़फोड़ की कार्रवाई को भुनाते हुए नगर निगम की सत्ता हासिल की थी। इस कारण सीलिंग कार्रवाई की दिशा में तत्काल रास्ता निकालना चाहिए।