सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर इमरजेंसी लेबल पर चला जाए तो सम-विषय फार्मूला लागू कर दिया जाना चाहिए। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण विभिन्न स्तरों को लेकर केंद्र सरकार की कार्ययोजना को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी है।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर निगरानी रखने वाले केंद्रों की संख्या में इजाफा करने के लिए भी कहा है।
साथ ही केंद्रों को नवीनतम तकनीकों से लैस करने और मूल सुविधाओं में बढ़ोतरी करने के लिए कहा है। पीठ ने सीपीसीबी को इसके लिए छह महीने का वक्त दिया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि अगर पार्टिकुलेट मैटर(पीएम) 2.5 का स्तर 250 से 430 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाएगा तो उसे गंभीर स्थिति माना जाएगा।
ऐसी स्थिति में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है और सम-विषम फार्मूला को लाया जाना चाहिए। वहीं पर्यावरणविद् सुनीता नारायण ने कहा कि केंद्र सरकार की कार्ययोजना की तीन स्तरों सामान्य से खराब, बहुत खराब और गंभीर को प्रभावी बनाया जा सकता है।