क्या है मामला पूरा मामला?
मामला साल 2017 के एक भ्रष्टाचार केस से जुड़ा है। आरोप है कि उस मामले में पुलिस हिरासत में रहने के दौरान सुकेश ने उसकी निगरानी कर रहे एक पुलिसकर्मी का मोबाइल फोन हासिल कर लिया। इसी फोन से उसने उस न्यायिक अधिकारी के सरकारी लैंडलाइन और मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, जो उसके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई कर रही थीं।
न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की गंभीर कोशिश
न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली या साधन संपन्न क्यों न हो, किसी जज को निजी फोन पर किसी मामले में अपनी इच्छा के मुताबिक फैसला देने का आदेश नहीं दे सकता। न्यायिक फैसले अदालत में कानून और सबूतों के आधार पर होते हैं, न कि गुप्त फोन कॉल या दबाव के आधार पर।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न्यायिक अधिकारी की गवाही भरोसेमंद है। अधिकारी ने फोन आने के बाद सुप्रीम कोर्ट से संपर्क कर बातचीत की पुष्टि करने की कोशिश की और इसके बाद शिकायत दर्ज कराई। अदालत ने कहा कि इसे शिकायत दर्ज करने में देरी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी की गवाही लगातार एक जैसी रही और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड से भी उसकी पुष्टि होती है। बचाव पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि अधिकारी ने सुकेश को फंसाने के लिए झूठी कहानी बनाई थी।