यह मामला तिरुपति लड्डू प्रसाद में कथित मिलावट के आरोपों से जुड़ा है। सुब्बा रेड्डी ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल (जून 2019 से अगस्त 2023) के दौरान घी खरीद में अनियमितताओं के मीडिया रिपोर्ट्स से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने उषोदया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड सहित कई मीडिया संस्थानों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था और प्रकाशनों पर तत्काल रोक की मांग की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश के लिए जरूरी शर्तें तत्काल खतरा, अपूरणीय क्षति और मजबूत प्रथम दृष्टया मामला पूरी नहीं होतीं।
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(ए)) और प्रतिष्ठा के अधिकार (अनुच्छेद 21) के बीच संतुलन पर जोर दिया। हालांकि, कोर्ट ने मीडिया को चेतावनी दी कि भविष्य के प्रकाशन कोर्ट की जांच के दायरे में रहेंगे और गलत रिपोर्टिंग पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी, जब प्रतिवादियों की दलीलें सुनी जाएंगी।