राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने वर्ष 1921 में जिस आयुर्वेद व यूनानी मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन किया था आज वह सरकारी सिस्टम की वजह से धूल फांक रहा है। बृहस्पतिवार को दिल्ली विधानसभा में कॉलेज की दयनीय स्थिति पर जब सवाल खड़े हुए तो खुलासा हुआ कि इस कॉलेज में हर दिन केवल पांच मरीज ही इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
एक वक्त था जब दिल्ली के करोल बाग स्थित ऐतिहासिक तिब्बिया कॉलेज में प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा रोगियों की ओपीडी और यहां 700 से अधिक दवाएं उपलब्ध थीं। लेकिन अब ओपीडी में जहां चार से पांच मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं छह से सात तरह की दवाएं ही मिल रही हैं।
ये आंकड़े विधानसभा में सवाल उठाते हुए करोलबाग से आप विधायक विशेष रवि ने सामने रखे। दरअसल तिब्बिया कॉलेज आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा को लेकर प्राचीन शैक्षणिक एवं चिकित्सीय संस्थानों में से एक है। दिल्ली सरकार ने करीब आठ वर्ष पहले इसे विश्वविद्यालय बनाने का ऐलान भी किया था, लेकिन इसके बारे में दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य महकमा भी अनजान है।
विधानसभा में सवाल उठाते हुए आप विधायक ने कहा कि करोड़ों रुपये के दवा घोटाले के बाद कोर्ट में मामला विचाराधीन है। अधिकारी इसी केस का हवाला देकर दवाएं खरीदी को लेकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि तिब्बिया कॉलेज में दवाओं की खरीदी में करोड़ों रुपये का घोटाला के मामला चल रहा है।
आरोप है कि दो दिन में ही कई करोड़ की दवाएं खरीदी गई थीं। लेकिन मंत्री जैन का ये भी कहना है कि कोर्ट में मामला होने के कारण मरीजों को दवाएं नहीं मिलेंगी, ये जवाब तर्कसंगत नहीं है। सख्त कार्रवाई को लेकर उन्होंने फैसला दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल पर टाल दिया।
दीपचंद बंधु में नहीं है डॉक्टर, एलजी देखेंगे
विधानसभा में दिल्ली सरकार के दीपचंद बंधु अस्पताल का मामला भी उठा। इस अस्पताल में लंबे समय से एनेस्थीसिया विभाग में विशेषज्ञों की कमी है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने एलजी अनिल बैजल के अधिकार क्षेत्र में ही नियुक्तियां होने का हवाला दिया।