नोएडा के सेक्टर-62 स्थित बैंक ऑफ इंडिया में नोएडा प्राधिकरण की तरफ से 200 करोड़ रुपये जमा कराने के बाद भी एफडी नहीं हुई और 11 दिनों तक प्राधिकरण के खाते का संचालन जालसाज अब्दुल खादर ने किया। इतने दिनों तक खाते का संचालन कर प्राधिकरण का खाता खाली करता रहा, लेकिन प्राधिकरण व बैंक को भनक तक नहीं लगी। इस लापरवाही में प्राधिकरण व बैंक के अधिकारी कर्मचारी जांच के घेरे में हैं। बताया जा रहा है कि 3.90 करोड़ निकालने के बाद जालसाज की नजर जमा 200 करोड़ पर भी थी। इसी क्रम में दूसरी बार जालसाज ने खाते से नौ करोड़ रुपये निकालने का प्रयास किया था।
प्राधिकरण ने 23 जून को सेक्टर-62 के बैंक ऑफ इंडिया में एफडी कराने के लिए 200 करोड़ रुपये जमा कराए। इसी दिन सभी तरह के कागजात भी जमा कराए गए, लेकिन बैंक ने एफडी नहीं की। इधर, जालसाज अब्दुल खादर प्राधिकरण का फर्जी अफसर बनकर कूट रचित दस्तावेज के माध्यम से प्राधिकरण के खाते का 11 दिन तक संचालन करता रहा। तीन जुलाई को जब अब्दुल ने नौ करोड़ रुपये निकालने का प्रयास किया तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
अब सवाल उठ रहा है कि 11 दिनों तक प्राधिकरण के खाते का संचालन जालसाज करता रहा और इस दौरान प्राधिकरण के 200 करोड़ रुपये की एफडी भी नहीं हुई। इसके बाद भी न प्राधिकरण और न ही बैंक को पता चला, यह कैसे संभव है? प्राथमिक जांच में यह लग रहा है कि मामले में हर कदम पर लापरवाही बरती गई। इस मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि प्राधिकरण के एफडी की खबर आखिर लीक कैसे हुई? पुलिस की टीम बैंक व प्राधिकरण के कर्मचारी-अधिकारी की मिलीभगत से इनकार नहीं कर रही है। जालसाज अब्दुल को प्राधिकरण के वित्त विभाग से लेकर बैंक की सटीक जानकारी थी। बताया जा रहा है अब्दुल के साथ बैंक और प्राधिकरण के लोगों की मिलीभगत है। उसे वित्त विभाग के कामकाज की पूरी जानकारी थी।
बैंक की सीसीटीवी फुटेज की जांच
नोएडा जोन के एडीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है। कई लोग शक के दायरे में हैं। जालसाजों से लेकर अलग-अलग लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। इसमें प्राधिकरण व बैंक के लोग भी शामिल हैं। पुलिस इस मामले में बैंक की सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है।
एफडी का मूल प्रपत्र भी बैंक में नहीं मिला
23 जून को 200 करोड़ रुपये बैंक को देने के बाद प्राधिकरण की तरफ से कागजात भी दिए गए थे। जब 3 जुलाई को प्राधिकरण को एफडी नहीं होने और 3.90 करोड़ रुपये की निकासी का पता चला तो उन्होंने बैंक से अपने दस्तावेज दिखाने के लिए कहा तो बैंक से प्राधिकरण का मूल दस्तावेज गायब था। इसके बदले अब्दुल खादर का दस्तावेज बैंक में मिला। इससे मामला और भी गंभीर हो गया।
इन सवालों का नहीं मिल रहा जबाव
- 200 करोड़ रुपये जमा कराने के बाद भी 11 दिनों तक एफडी क्यों नहीं।
- 11 दिनों तक प्राधिकरण के खाते का संचालन जालसाज अब्दुल करता रहा लेकिन बैंक व प्राधिकरण को भनक तक नहीं
- आखिर जालसाज अब्दुल खादर को प्राधिकरण के एफडी की जानकारी कैसे हुई।
- बैंक ऑफ इंडिया से प्राधिकरण का मूल दस्तावेज कैसे गयाब हुआ, उसके बदले अब्दुल का दस्तावेज बैंक में कैसे मिला।
- जालसाज अब्दुल खादर का नोएडा प्राधिकरण व बैंक में किन किन लोगों से कनेक्शन है।
बैंक वापस करेगा 3.90 करोड़ रुपये
नोएडा प्राधिकरण की तरफ से बताया गया है कि इस मामले में बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ कोतवाली सेक्टर-58 में मुकदमा दर्ज कराया गया है। वहीं बैंक की तरफ से आश्वासन दिया गया है कि प्राधिकरण को फ्रॉड की रकम को वापस कर दिया जाएगा और 200 करोड़ की धनराशि दे दिया जाएगा। वहीं इस मामले में प्राधिकरण में भी जांच चल रही है।