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जेएनयू छात्र नजीब की मां फातिमा बोलीं, पीएम की भतीजी की तरह तलाशते तो मेरा बेटा साथ होता

Tue, 15 Oct 2019 02:24 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नजीब अहमद की मां फातिमा - फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भतीजी का पर्स झपटमार छीन लेते हैं और देश की सबसे स्मार्ट पुलिस 24 घंटे में आरोपियों के साथ सामान व पैसा बरामद कर लेती है। काश मेरे बेटे नजीब के लिए भी दिल्ली पुलिस और सीबीआई ने ऐसे ही जांच की होती तो आज मैं शहर-दर-शहर नहीं भटकती। 

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अमर उजाला से विशेष बातचीत में जेएनयू से लापता एमएससी बायोटेक्रोलॉजी के छात्र व बंदायु निवासी नजीब की मां फातिमा नफीस ने यह बात कही। तीन साल पहले (15 अक्तूबर 2016) जेएनयू कैंपस से दिनदहाड़े नजीब लापता हो गया था पर आज तक सीबीआई के हाथ खाली हैं। 

तीन साल पूरे होने की पूर्व संध्या पर सोमवार को फातिमा नफीस जेएनयू पहुंची हैं। वे बेटे की तलाश में जब भी दिल्ली आती हैं तो जेएनयू कैंपस में रुकती हैं। एक उम्मीद के साथ कि शायद अल्लाह का करिश्मा हो जाए और उनके बेटे की कोई खबर मिल जाए।
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फातिमा कहती हैं कि मेरा बेटा कैंपस से तीन सालों से लापता है पर देश की सबसे स्मार्ट कही जाने वाली दिल्ली पुलिस से लेकर सीबीआई के हाथ खाली हैं। मैं अक्सर एक ही सवाल करती हूं कि यदि मेरे बेटे की जगह किसी नेता या अधिकारी का बेटा होता, तब भी सुरक्षा जांच एजेंसियां ऐसे ही खाली हाथ अदालत में खड़ी होती? एक मां नेता, पुलिस, केंद्रीय गृहमंत्री, प्रधानमंत्री से लेकर अदालत के चक्कर काटती रही पर सबकी चुप्पी टूटती ही नहीं है? आंखों में आंसू और हाथों में बेटे की फोटो थामें बेबस फातिमा नफीस हर आहट पर पूछती है कि मेरा नजीब आ गया या उसका कुछ पता लगा? 

मोदी सरकार और उनकी एजेंसियां फेल 
फातिमा ने कहा कि एबीवीपी के उन छात्रों को बचाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां भी चुप हैं। क्योंकि कैंपस में लापता होने से पिछली रात एबीवीपी के छात्रों ने नजीब के साथ मारपीट की थी। दिन-दहाड़े कैंपस से नजीब गायब हो जाता है पर तीन सालों में उसका कोई सुराग नहीं? 

जंतर-मंतर पर आज गूंजेगी नजीब को तलाश की मांग
जेएनयू छात्रसंघ, वामपंथी छात्र संगठनों के अलावा जामिया, डीयू, अंबेडकर, एएमयू, इलाहाबाद के अलावा कश्मीरी छात्र भी जंतर-मंतर पर मंगलवार को जुटने वाले हैं। कार्यक्रम में नजीब की मां फातिमा भी शामिल होंगी। इसमें छात्रों समेत परिजन देश की सुरक्षा एजेंसियों व सरकार से एक ही सवाल पूछेंगे कि तीन सालों से आखिर नजीब को क्यों नहीं तलाश पाएं? इस विरोध प्रदर्शन का अभियान सोशल मीडिया पर भी जोरों से चल रहा है। 
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टाइम लाइन
-14 अक्तूबर 2016 की रात कैंपस स्थित हॉस्टल में नजीब अहमद और एबीवीपी के कुछ छात्रों के बीच मारपीट हुई। 
- 15 अक्तूबर को माही-मांडवी हॉस्टल से नजीब अहमद लापता हो गया। 
- 17 अक्तूबर को विश्वविद्यालय प्रबंधन ने परिजनों के साथ दिल्ली पुलिस में लापता की शिकायत दर्ज करवाई 
- इसके बाद दिल्ली पुलिस की जांच चलती रही। परिजनों की मांग पर अदालत ने जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा। इसके बाद आज तक
किसी भी जांच एजेंसी को नजीब से जुड़ी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है।

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