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सेप्टिक टैंक हादसा: ढाई साल की बेटी, आठ माह के मासूम के सिर से उठा पिता का साया; दिल्ली में मशीनों के दावे फेल

Sat, 27 Jun 2026 08:37 AM IST
Vijay Singh Pundir धनंजय मिश्रा/फिरदौस आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुंडका में तीन मजदूरों की मौत ने फिर उस सवाल को जिंदा कर दिया है, जिसका जवाब वर्षों से नहीं मिल सका है। सीवर और सेप्टिक टैंक की जब मेनुअल सफाई पर रोक है और मशीनों से सफाई के दावे किए जाते हैं, तो आखिर मजदूर अब भी जहरीली गैस से दम घुटने की मौत क्यों मर रहे हैं। 
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सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे तीन मजदूरों की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक फैक्टरी के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। घटना की सूचना पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने अरुण (38), संदीप (32) और चांद (42) सेप्टिक टैंक से निकाला और संजय गांधी अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने फैक्टरी मालिक सूरज मारवाह, फैक्टरी कर्मी जयंत और ठेकेदार नीरज के खिलाफ मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।

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मुंडका सेप्टी टैंक हादसे ने केवल चांद की जिंदगी ही नहीं छीनी, बल्कि उनकी ढाई साल की बेटी और आठ महीने के मासूम के सिर से एक पिता का साया भी छीन लिया। चांद के भतीजे वासु ने बताया कि पड़ोस के कुछ लोग अचानक घर पर चाचा की आईडी मांगने आए। उन्होंने जब चाचा के साथ अनहोनी का जिक्र किया तो वह भागते हुए मौके पर पहुंचे। यहां चाचा को मृत अवस्था में देखकर चीख निकल गई।

चांद चाचा के परिवार में उनकी पत्नी और दो मासूम बच्चे हैं। रोते हुए वासु ने बताया कि चाचा रोज सुबह काम पर निकलते थे जबकि शाम को मोमोज-फिंगर की रेहड़ी लगाते थे। पूरा परिवार किराए के मकान में जीवन गुजर बसर करते थे। उनकी मौत की खबर जैसे ही उनके घर पहुंची। पूरे परिवार में मातम पसर गया। किराए एक छोटे से कमरे में चीख पुकार मच गई। परिजनों ने बताया कि चांद बेहद स्वाभिमानी और मेहनती इंसान थे। शुक्रवार को वह काम पर निकले थे कि चंद रुपये उसकी गृहस्थी की गाड़ी को चलाने के काम आएंगे लेकिन इस हादसे ने उन्हें छीन लिया और गृहस्थी की गाड़ी उनकी मौत से पटरी से उतर गई।

चंद रुपयों के लिए दांव पर लगा दी जिंदगी
संदीप के परिजनों ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से थे और सुल्तानपुरी में किराए के घर में रहते थे। वह महीने में बमुश्किल 12 से 13 हजार रुपये कमा पाता थे। जिस दिन काम नहीं मिलता, उस दिन घर का चूल्हा जलाना मुश्किल होता था। इसलिए वह घर पर खाली नहीं बैठते थे। संदीप के मौसा सुरेंद्र बताते हैं कि उन्होंने अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, एक छोटा भाई, पत्नी और एक 12 साल की बेटी छोड़ गया है।

साथियों को बचाने में गई अरुण की जान
संजय गांधी अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर रोते हुए नरेंद्र उर्फ सोनू ने बताया कि उनका भाई अरुण उर्फ टोनी भी मुंडका में उसी मौत के सेप्टिक टैंक की भेंट चढ़ गया। उन्होंने बताया कि टैंक में उतरे पहले साथी को तड़पता देख मेरा भाई अरुण उसे बचाने के लिए नीचे उतरा था, लेकिन जहरीली गैस ने उसे भी संभलने का मौका नहीं दिया। इसके बाद तीसरे साथी संदीप ने भी दोनों को बचाने के चक्कर में दम तोड़ दिया।

बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त विक्रम सिंह ने बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब 12:03 बजे मुंडका थाना पुलिस को फैक्टरी में सफाई के दौरान तीन लोगों के सेप्टिक टैंक में गिरने की सूचना मिली। मौके पर पुलिस और दमकल कर्मी पहुंचे तो पता चला कि सफाई के दौरान तीनों कर्मचारी टैंक में बेहोश हो गए। दमकल कर्मी सुरक्षा किट पहनकर नीचे उतरे और तीनों को बाहर निकाला। एंबुलेंस के जरिये उन्हें अस्पताल भेजा गया।

शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि तीनों की मौत जहरीली गैस की चपेट में आने की वजह से हुई है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इनके मरने के कारणों के बारे में जानकारी मिल पाएगी। पुलिस ने बीएनएस की धारा 376/26, 106/3(5) और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस छानबीन में पता चला कि गली नंबर एक मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में मारवाह प्रिंटर्स ने फैक्टरी के अंदर बने सेप्टिक टैंक को साफ करने के लिए नांगलोई निवासी नीरज को ठेका दिया था। नीरज से फैक्टरी कर्मी जयंत के कहने पर बातचीत हुई थी। नीरज ने ही सुल्तानपुरी के रहने वाले अरुण, संदीप और चांद को काम करने के लिए बुलाया था।

एक के बाद एक बेहोश हुए मजदूर
तीनों मजदूर मशीन से टैंक की सफाई कर रहे थे। टैंक के नीचे के हिस्से में कचरा पड़ा था, जिसे मशीन से नहीं निकाल पा रहे थे। चांद को कुछ ज्यादा पैसे देने की बात कहकर उसे टैंक के भीतर भेजा गया तो वह अंदर जाते ही बेहोश होकर गिर गया। उसे निकालने के लिए अरुण अंदर पहुंचा, लेकिन वह भी बेहोश हो गया। उसके बाद संदीप भी बिना सुरक्षा उपाय के टैंक के अंदर चला गया। तीनों के अचेत होकर टैंक में गिरने के बाद फैक्टरी में मौजूद लोगों ने पुलिस और दमकल विभाग को घटना की जानकारी दी।

मशीनों से सफाई का दावा, फिर भी मौत के मुंह में उतरने के लिए मजबूर मजदूर
मुंडका में तीन मजदूरों की मौत ने फिर उस सवाल को जिंदा कर दिया है, जिसका जवाब वर्षों से नहीं मिल सका है। सीवर और सेप्टिक टैंक की जब मेनुअल सफाई पर रोक है और मशीनों से सफाई के दावे किए जाते हैं, तो आखिर मजदूर अब भी जहरीली गैस से दम घुटने की मौत क्यों मर रहे हैं। सिस्टम भी इस बारे में मौन है। पिछले दिनों संसद में केंद्र सरकार ने भी स्वीकारा है कि 2017 से 17 मार्च 2026 तक देश में 622 मजदूरों और दिल्ली 62 मजदूर ऐसे ही हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं।

देश में हाथ से मैला उठाने पर रोक लगाने के लिए 2013 में कानून बनाया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 और फिर 2023 में स्पष्ट निर्देश दिए कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई पूरी तरह सुरक्षित और अधिकतम मशीनीकृत तरीके से होनी चाहिए लेकिन सरकार के आंकड़े तो इस निर्देश के पालन नहीं होने की गवाही देते हैं। दिल्ली सीवर नेटवर्क और सेप्टिक टैंक दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चलती हैं। नियोजित कॉलोनियों के बड़े हिस्से में जहां सीवर लाइनें हैं, जबकि अनधिकृत कॉलोनियों, पुराने गांवों, फार्महाउसों, छोटे औद्योगिक परिसरों और कई निजी संस्थानों में आज भी सेप्टिक टैंक प्रचलन में हैं। इनकी सफाई का बड़ा हिस्सा निजी स्तर पर कराया।

हाल में हुए हादसे
  • 22 अगस्त 2025 : बाहरी दिल्ली के लिबासपुर इलाके में कमर्शियल-कम-रेसिडेंशियल बिल्डिंग के बड़े सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई।
  • 17 मई 2024 : बवाना इंडस्ट्रियल एरिया की एक फैक्ट्री में बने सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई।
  • 24 मार्च 2023 : पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया स्थित निजी फैक्ट्री के गहरे सीवर/सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान एक की मौत हो गई।
  • 30 मार्च 2022 रोहिणी इलाके में चार लोगों की सीवर में फंसने से मौत हो गई है। चारों लोगों के शव को एनडीआरएफ की टीम ने रात भर रेस्क्यू ऑपरेशन करके निकाला
  • 27 मार्च 2021 : पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में बैंक्वेट हाल के सेप्टिक टैंक के सफाई के दौरान हुई मौत।
  • 11 अक्तूबर 2020: बदरपुर इलाके में सेप्टिक टैंक की सफाई के एक गंभीर हालत बनी। दौरान दो लोगों की मौत हुई जबकि जाता है, जहां निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन अक्सर सवालों के घेरे में रहता है।

यह हैं नियम
किसी भी व्यक्ति को बिना सुरक्षा इंतजाम के सीवर या सेप्टिक टैंक में उतारना प्रतिबंधित है। यदि विशेष परिस्थिति में अंदर जाना जरूरी हो, तो पहले टैंक की जहरीली गैसों और ऑक्सीजन स्तर की जांच करना, पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करना, सफाई कर्मी को हेलमेट, फुल बॉडी पीपीई किट, दस्ताने, गमबूट, हार्नेस, गैस डिटेक्टर और आवश्यकता होने पर श्वसन उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है। मौके पर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने फैसलों में राज्यों और स्थानीय निकायों को इन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने और उल्लंघन की स्थिति में जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
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मशीनें हैं, लेकिन सही इस्तेमाल नहीं...
निजी स्तर पर सेप्टिक टैंक की सफाई में सक्शन मशीनों और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल पहले की तुलना में बढ़ा है, लेकिन बड़ी समस्या इनके अधूरे या गलत उपयोग की है। कई मामलों में मशीन से केवल तरल अपशिष्ट निकाला जाता है, जबकि टैंक के तल में जमी गाद हटाने को मजदूरों को भीतर उतार दिया जाता है।
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