एम्स के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी को हटाने का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने संजीव के समर्थन में केंद्र सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। तो सोशल मीडिया पर भी सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है।
हरियाणा कैडर के इस तेज तर्रार ऑफिसर को हटाए जाने से उठे विवाद के बाद कई बड़े खुलासे हुए हैं। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
यही नहीं, इस विवाद के बाद यह भी सामने आया है कि जिस एम्स में लोगों को इलाज के लिए लाइन लगानी पड़ती है, वहां अधिकारियों के कुत्तों का इलाज कराया गया। और जब सीवीओ ने इसका खुलासा किया तो उन्हें पद से हटाने की साजिश शुरू हुई।
इसके पहले भी संजीव पर गंभीर आरोप लगे और पांच साल में उनका 12 बार ट्रांसफर किया गया, लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रपति ने उन्हें ईमानदार घोषित करते हुए सम्मानित भी किया था।
एम्स में 'खेमका' के नाम से मशहूर सीवीओ का हटाए जाने के तीन सबसे अहम कारण क्या हैं, जानिए आगे की स्लाइड में।
ये है CVO को हटाने की सबसे बड़ी वजह!
संजीव चतुर्वेदी को हटाए जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण ये रहा कि उन्होंने 2012 में बतौर सीवीओ नियुक्त होने के बाद से ही अपने काम में तेजी दिखाई और 2 साल में दस बड़े मामलों का पर्दाफाश किया। यही वजह थी कि वह सरकार और उनके 'चहेते' नेताओं की आंखों की किरकिरी बनते गए।
संजीव ने तत्कालीन एम्स एडमिनिस्ट्रेटर विनीत चौधरी के खिलाफ जांच शुरू की। दरअसल उन्हें शिकायत मिली थी कि चौधरी ने एम्स में अपने कुत्ते का इजाज कराया है। एम्स के कैंसर सेंटर में कुत्ते के इलाज की बात सामने आने के बाद संजीव ने जांच की और उसमें यह बात सही पाई।
इसके अलावा चौधरी पर सरकारी पैसे व गाड़ियों के गलत इस्तेमाल के भी आरोप लगे। इस मामले में सीबीआई ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया था।
बताया जा रहा है कि वतर्मान में हिमाचल में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनात विनीत चौधरी ने दिग्गज भाजपा नेता जेपी नड्डा से करीबी का फायदा उठाते हुए संजीव के खिलाफ शिकायत की और उन्हें पद से हटाने को कहा। इसके बाद नड्डा ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम अबी आजाद को पत्र लिखकर उनकी शिकायत की थी।
दूसरी वजह: करोड़ों के घोटाले की पोल खोली
सीवीओ संजीव चतुर्वेदी ने एम्स में एक के बाद एक कई बड़े मामलों की जांच की और उनमें हुए बड़े घोटालों की पोल खोली। संजीव ने एम्स में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड के टेंडर में करोड़ों के घोटाले की जांच की।
जांच पूरी होने के बाद जब उन्होंने रिपोर्ट पेश की तो उसके आधार पर सीबीआई ने आईपीएस अधिकारी शैलेश यादव के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। संजीव ने इसके बाद भी अपना काम जारी रखा और एक के बाद एक मामले खोलते गए।
उनकी कार्यशैली से कई भ्रष्ट अधिकारियों की पोल खुली तो कुछ नेता भी फंसते नजर आए। यही वजह रही कि सरकार ने उनकी छुट्टी कर दी।
संजीव को हटाने का मामला इसलिए भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि सरकार इस नियुक्ति को ही अवैध करार दे रही है। यही नहीं, एम्स में संजीव चतुर्वेदी की नियुक्ति की फाइल गायब हो गई।
तीसरी वजह: कांग्रेस विधायक की दुकान पर छापा
संजीव ने बतौर सीवीओ, एम्स में कांग्रेस के पूर्व विधायक की दवाइयों की दुकान पर भी छापेमारी की थी। दुकान से दिल्ली पुलिस ने नकली और घटिया इवाएं भी बरामद की थीं।
संजीव ने एक साथ कई हाईप्रोफाइल मामले खोले तो उनसे जुड़े हाईप्रोफाइल लोगों को अपनी इज्जत और कुर्सी खतरे में नजर आने लगी। विनीत चौधरी, शैलेश यादव, पूर्व विधायक अशोक आहूजा, पूर्व मेडिकल सुपरिंटेंडेंट आरसी आनंद, मुख्य सुरक्षा अधिकारी राजीव लोचन, एम्स के मुख्य प्रशासक अत्तर सिंह, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर बीएस आनंद समेत कई अन्य बड़े पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की।
यही नहीं, एक लेडी डॉक्टर के मामले में संजीव की भिड़ंत स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से हो गई जिसके चलते उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया।
इन सबकी पहुंच 'ऊपर' तक होने के कारण संजीव को ही अपनी ईमानदारी का खामियाजा भुगतना पड़ा। 20 अगस्त को संजीव को हटाए जाने के बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन छुट्टी ले ली है। किसी को नहीं पता कि वह अब कब वापस आ रहे हैं।