सप्ताह के पहले कार्यदिवस पर जाम में न फंसे इसलिए गूगल मैप पर ट्रैफिक देखकर निकलें
मैप पर रेड लाइन दिखने पर वैकल्पिक रास्तों से गुजरना रहेगा बेहतर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के एम्स, आईएनए और रिंग रोड की ओर सोमवार को बारापुला फेज-3 के रास्ते पीक ऑवर्स में जाने की तैयारी है तो घर से निकलने से पहले गूगल मैप पर ट्रैफिक की स्थिति जरूर देख लें। ऐसा न करने पर नोएडा लिंक रोड से आईएनए के बीच सिग्नल फ्री सफर के दावे वाले इस कॉरिडोर पर तीन बड़े बॉटलनेक में फंसकर दफ्तर पहुंचने में देरी हो सकती है। गूगल मैप पर रूट लाल दिखाई दे तो वैकल्पिक रास्ता चुनना बेहतर होगा।
बारापुला फेज-3 के खुलने के बाद बुधवार से शुक्रवार तक इस नए कॉरिडोर पर लगातार जाम की स्थिति बनी रही। मयूर विहार से दक्षिणी दिल्ली की ओर जाने वाली लेन में करीब 2.5 किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। अगले दिन स्थिति और बिगड़ी और जाम पीछे प्रवेश बिंदु मयूर विहार तक पहुंच गया। इसके बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी के ड्रोन सर्वे में कॉरिडोर की कुछ ढांचागत खामियां सामने आईं।
ट्रैफिक विशेषज्ञों के मुताबिक, समस्या नए एलिवेटेड रोड की क्षमता से अधिक उसके पुराने बारापुला फेज-1 से जुड़ने के तरीके में है। रास्ते में लगातार तीन जगह ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है। अलग-अलग दिशाओं से आने वाला यातायात कुछ ही दूरी में कम लेन में सिमट जाता है। ऐसे में तेज आवाजाही के लिए बनाया गया नया कॉरिडोर खुद वाहनों की लंबी कतार में बदल जाता है।
ब्रेकर नंबर-1: 90 डिग्री का मोड़ बना पहला बॉटलनेक
नया बारापुला फेज-3 सन डायल के पास करीब 90 डिग्री के मोड़ पर पुराने बारापुला फेज-1 से जुड़ता है। यहां तीन लेन का नया यातायात दो लेन वाले पुराने एलिवेटेड रोड पर आ जाता है। लेन कम होते ही वाहनों की रफ्तार घट जाती है और पीक ऑवर्स में लंबी कतार लगने लगती है।
ब्रेकर नंबर-2: सराय काले खां का लूप बढ़ा रहा दबाव
पहले बॉटलनेक से कुछ ही दूरी पर सराय काले खां की ओर से आने वाला दो लेन का लूप पुराने बारापुला फेज-1 में मिल जाता है। यहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाला यातायात दो लेन में सिमट जाता है। फेज-3 का ट्रैफिक जुड़ने के बाद पहले से दबाव झेल रहे इस हिस्से पर वाहनों का भार और बढ़ जाता है।
ब्रेकर नंबर-3: 500 मीटर आगे फिर जुड़ता दो लेन का ट्रैफिक
दूसरे बॉटलनेक से करीब 500 मीटर आगे डीएनडी-महारानी बाग की ओर से आने वाला दो लेन का ट्रैफिक लूप के जरिये बारापुला कॉरिडोर में मिलता है। एम्स और आईएनए की ओर जाने वाले वाहन भी इसी हिस्से से चढ़ते हैं। पहले से धीमे चल रहे यातायात में अतिरिक्त वाहनों के शामिल होने से जाम और लंबा हो जाता है।
ड्रोन सर्वे में ट्रैफिक पुलिस ने सुझाए तीन उपाय
1. मर्जर प्वॉइंट की ज्यामिति में बदलाव: सूर्य घड़ी के पास मर्जर प्वॉइंट की बनावट में बदलाव कर मोड़ को अधिक सरल बनाया जाए।
2. मर्जिंग प्वॉइंट पर सिग्नल: ट्रैफिक के बहाव को नियंत्रित करने और एक साथ अधिक वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए मर्जिंग प्वॉइंट पर सिग्नल लगाए जाएं।
3. पुराने बारापुला कॉरिडोर का इस्तेमाल: यातायात का दबाव कम करने के लिए जरूरत के अनुसार ट्रैफिक को पुराने बारापुला कॉरिडोर की ओर डायवर्ट किया जाए।