पीडीएफ के जरिये बताया जाता था कि बम में कौन सा केमिकल मिलाकर उसकी तीव्रता बढ़ाई जा सकती है। पाक में बैठे हैंडलर लगातार लोगों को जिहाद के लिए तैयार करने के लिए कहते थे। स्पेशल सेल को विदेश से होने वाली फंडिंग के सबूत भी मिले हैं। इसके अलावा वाहन चोरी कर आतंकी अपने माल-ए-गनीमत बढ़ाने का भी प्रयास कर रहे थे। मामले की जांच कर रहे एक अधिकारी ने बताया कि शाहनवाज ने नामी संस्थान से माइनिंग में इंजीनियरिंग की थी।
पढ़ाई के दौरान शाहनवाज को खनन के लिए किए जाने वाले विस्फोट की जानकारी दी गई थी। शाहनवाज ने अपनी इस जानकारी को इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिये और बढ़ा लिया। शाहनवाज दो-दो मीटर के पाइप में केमिकल डालकर जंगल में ले जाकर धमाका करता था। उसकी क्षमता को और बढ़ाने के लिए बार-बार उसमें केमिकल बढ़ाने के निर्देश दिए जाते थे। बाद में इसका वीडियो बनाकर सीमापार भेजा जाता था।
आतंकियों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के लिए उनको विदेश से तो फंड मिलता ही था। लेकिन यहां अपने स्तर पर फंड जुटाने के लिए वह अपने माल-ए-गनीमत को बढ़ाने के लिए वाहन चोरी करते थे। पुणे में इसी तरह की वारदात को अंजाम देते हुए शाहनवाज पकड़ा गया था, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। बाद में एनआईए ने इसकी गिरफ्तार पर तीन लाख का इनाम घोषित किया था।