दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने नौकरी लगवाने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर गिरोह के मास्टरमाइंड व दो युवतियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी लक्ष्मी नगर में कॉल सेंटर चलाकर ठगी कर रहे थे और बेरोजगार युवक-युवतियों को प्लेसमेंट एजेंसी व किसी प्रतिष्ठित संस्था का अधिकारी बताते थे। आरोपी पिछले डेढ़ वर्ष में 250 से ज्यादा बेरोजगार युवक-युवतियों से 75 लाख रुपये ज्यादा ठग चुके हैं। मास्टरमाइंड ने इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की हुई है।
साइबर क्राइम यूनिट डीसीपी अन्येष रॉय ने बताया कि पीड़ित युवती ने बैंक में नौकरी के लिए कई जॉब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया हुआ था। कुछ दिन पहले युवती के पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को प्लेसमेंट एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसका चलन मल्टी नेशनल बैंक में हो गया है। पीड़ित के पास कभी साक्षात्कार तो कभी कागज चैक करने के नाम पर कई फोन आए।
इस तरह आरोपियों ने युवती से सिक्यूरिटी फीस, वेरीफिकेशन और साक्षात्कार आदि के नाम पर एक लाख 34 हजार रुपये ठग लिए। आरोपियों के फोन उठाने बंद कर दिए तो पीड़िता बैंक गई और ठगे जाने का पता लगा। पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्जकर इंस्पेक्टर विजय गहलावत, एसआई विजेन्द्र और एएसआई रोशन की टीम ने जांच शुरू की।
एसआई विजेन्द्र की टीम ने जांच के बाद लक्ष्मी नगर स्थित कॉल सेंटर में दबिश देकर सोमवार को मास्टरमाइंड अमित कुमार, विश्वास नगर निवासी भावना व शकरपुर निवासी मेघना को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरोह के पर्दाफाश होने के बाद ये बात सामने आई है कि देश में अब बेरोजगार लोगों का डाटा भी बिकने लगा है। आरोपियों ने बताया कि वह बेरोजगार युवक-युवतियों का डाटा जॉब पार्टल को रुपए देकर खरीदते थे।
ये पीड़ितों को कॉल कर प्लेसमेंट एजेंसी व किसी बड़ी संस्था का अधिकारी बताते थे। पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए ये कई बार उनका साक्षात्कार लेते थे। इसके बाद कई तरीके की फीस लगने के नाम पर बेरोजगारी युवक-युवतियों को ठग लेते थे। अमित (33) ने ग्रेटर नोएडा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग कर रखी है। मेघा(22) और भावना(32) ने स्नातक किया हुआ है।