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दिल्ली मेट्रो फेज तीन मे देरी के ये तीन दुश्मन, नहीं होने दे रहे काम पूरा

Mon, 26 Dec 2016 11:20 AM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
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मजेंटा मेट्रो का ट्रायल - फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला
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दिल्ली मेट्रोरेल के फेज-तीन में निर्माण 98 फीसदी पूरा होने के बावजूद पूरे कॉरिडोर पर मेट्रो परिचालन शुरू होने में लगातार देरी हो रही है। निर्माण और परिचालन शुरू होने में देरी के पीछे भूमि अधिग्रहण के जटिल कानून के अलावा हाईटेक नए सिग्नल सिस्टम को इंटिग्रेट करने में समय ज्यादा लगा रहा है।
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तो केंद्रीय करों के बदले दिल्ली सरकार राशि की भरपाई नहीं कर पा रही है। मेट्रो का किराया करीब 6 साल से नहीं बढ़ा तो केंद्रीय करों की भरपाई का पैसा सरकार ने पिछले दो साल से नहीं दिया। इन सबके बीच टुकड़ों में परिचालन शुरू करना भी शिव विहार से त्रिलोकपुरी के बीच मुश्किल है।

अमर उजाला से विशेष बातचीत में मेट्रो चीफ मंगू सिंह ने माना कि भूमि अधिग्रहण कानून में ऐसे प्रावधान हैं कि प्रोजेक्ट के लिए जमीन मिलनी मुश्किल हो रही है। दिल्ली मेट्रो ने कई जगह सीधे तौर पर बाजार कीमत देकर जमीन ली है।
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...लेकिन 98 फीसदी सिविल वर्क पूरा हो चुका है

दिल्ली मेट्रो - फोटो : रपििप
​इसी को ध्यान में रखकर मेट्रो फेज-4 के निर्माण में सामान्य प्रोजेक्ट के मुकाबले एक साल ज्यादा समय मांगा है। मंगू सिंह कहते हैं कि आईटीओ से कश्मीरी गेट, बॉटनिकल गार्डन-कालका जी तक ट्रॉयल चल रहा है जिसमें नया सिग्नलिंग सिस्टम है। इसमें भी देरी हो रही है।

मंगू सिंह ने कहा कि फेज-तीन निर्माण में देरी कह सकते हैं लेकिन 98 फीसदी सिविल वर्क पूरा हो चुका है। हसनपुर और त्रिलोकपुरी में जमीन मिलने की दिक्कत हैं। उन्होंने ने माना कि हसनपुर में छोटे से जमीन के टुकड़े की वजह से उत्तर पूर्वी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली को फेज-तीन की मेट्रो देरी से मिलेगी।

मुकुंदरपुर से मयूर विहार फेज-एक तक मेट्रो टुकड़ों में शुरू हो सकेगी लेकिन उससे आगे दिक्कत है। त्रिलोकपुरी में निर्माण बाकी है तो हसनपुर के पास भी दिक्कत। ये हिस्से किसी डिपो से जुड़ा नहीं है। इसकी वजह से टुकड़ों में भी शिव विहार से आनंद विहार तक मेट्रो ट्रॉयल नहीं कर पाएंगे।

हसनपुर में मेट्रो के रास्ते की जमीन का मालिक कौन?

दिल्ली मेट्रो
दिल्ली मेट्रोरेल फेज-तीन ट्रैक का हसनपुर डिपो के पास  रास्ता रोकने वाली 1555 वर्ग मीटर जमीन का मालिक कौन है, इसे लेकर कई विभाग उलझन में हैं। दिल्ली मेट्रोरेल कार्पोरेशन को राजस्व विभाग ने कहा है कि जमीन डीडीए की है जबकि डीडीए ने इससे पहले कहा था कि ये जमीन प्राइवेट व्यक्ति की है। अब डीएमआरसी जमीन किससे मांगे, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।

सूत्रों के अनुसार, डीएमआरसी हसनपुर में इस जमीन के लिए डीडीए से लगातार संपर्क में है। डीडीए ने मेट्रो को बताया था कि प्राइवेट व्यक्ति की जमीन है, उससे मोलभाव कर लीजिए। जब राजस्व विभाग ने डीएमआरसी ने मालिकाना हक पता करना चाहा तो वहां बताया गया कि ये जमीन डीडीए की है।

डीएमआरसी के निदेशक (वर्क्स) जितेंद्र त्यागी ने अमर उजाला के सवाल पर कहा कि अब डीडीए को फिर पत्र लिखा है कि क्लियर करें कि हसनपुर के पास जो जमीन रास्ते में आ रही है वो किसकी है। त्यागी का कहना है कि हसनपुर में जमीन एक पिलर की चाहिए लेकिन दो और पिलर निर्माण में छोड़ रखे हैं। जब जमीन मिलेगी, उसके बाद डेढ़-दो महीने में काम पूरा कर लेंगे।
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मेट्रो फेज-चार के निर्माण में केंद्रीय करों की भरपाई नहीं करेगी दिल्ली सरकार

दिल्ली मेट्रो - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
दिल्ली सरकार मेट्रो रेल फेज-चार के निर्माण खर्च में आने वाले केंद्रीय करों के बदले अपने हिस्से की भरपाई नहीं करेगी। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को दिल्ली सरकार कैबिनेट की आगामी बैठक में मंजूरी दे सकती है।

उसमें यह साफ किया जाएगा कि केंद्र सरकार केंद्रीय करों से सिर्फ 325 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी देती है तो फिर दिल्ली सरकार मेट्रो निर्माण में हजारों करोड़ रुपये की भरपाई क्यों करे? इस फैसले से मेट्रो प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकता है।

सूत्र बताते हैं कि मेट्रो फेज-4 के डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को फंडिंग पैटर्न में बदलाव के साथ मंजूरी देगी। मसलन केंद्रीय करों के बदले 50 फीसदी भरपाई दिल्ली सरकार फेज-4 में नहीं करेगी। फेज-4 में 104 किमी निर्माण होना है जिसमें 55, 208 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इसमें केंद्रीय करों के बदले दिल्ली सरकार को पुराने पैटर्न के हिसाब से 3098 करोड़ रुपये की भरपाई करनी होगी।

बताते चलें कि केंद्रीय करों की भरपाई फेज-तीन को लेकर भी दिल्ली सरकार पिछले तीन वित्त वर्ष से नहीं कर रही है। डीएमआरसी बोर्ड की तीन बैठकों में मसला उठ चुका है। प्रबंध निदेशक दिल्ली सरकार को कई बार पत्र लिख चुके हैं कि 1849.10 करोड़ रुपये में बची हुई राशि का भुगतान करें, पैसे की कमी से काम प्रभावित होने की आशंका है।
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