एक पीड़ित 26 वर्षीय विवाहित दो मई 2026 से पश्चिम बंगाल से लापता थी। 25 अगस्त 2026 को उसने अपनी मां को फोन कर जीबी रोड, दिल्ली के कोठा नंबर 58 में कैद होने की जानकारी दी। सूचना मिलने पर किरण सेठी, महिला कांस्टेबल कोमल और रश्मि ने पीड़िता को बचाया। जो तीन बच्चों की मां है।
पीड़िता ने बताया कि कालू नामक व्यक्ति उसे नौकरी का झांसा देकर दिल्ली लाया और गीता को बेच दिया। गीता ने उसे एक महीने अपने घर रखा, फिर कोठा नंबर 58 पर रेशमा को सौंप दिया, जिसने उसे वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया। मंजू और गीता उसकी कमाई अपने पास रखती थीं।
दूसरी पीड़िता की आपबीती
जांच के दौरान, एक अन्य महिला 28 वर्षीय ने भी महिला पुलिस चौकी से मदद मांगी। उसे भी उसी कोठा नंबर 58 से बचाया गया। पीड़िता ने बताया कि करीब दो साल पहले पश्चिम बंगाल में पति से झगड़े के बाद वह अपने आठ वर्षीय बेटे के साथ घर छोड़ गई थी। एक महिला ने उसे और उसके बेटे को नौकरी का झांसा देकर गीता के घर पहुंचाया। बाद में उसे झाड़ू-पोछा के काम का वादा कर वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया गया। इन महिलाओं को लगातार धमकी दी जा रही थी।