अगर दिल्ली सरकार अपनी जिद पर अड़ी रही और नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन(एनटीपीसी) ने अपने हालिया फैसले को सच में बदल दिया तो आने वाले महीने दिल्लीवासियों के लिए अंधेरे और भीषण गरमी भरे हो सकते हैं।
बता दें कि केजरीवाल सरकार ने एनटीपीसी से महंगी बिजली मिलने के कारण बिजली के क्षेत्र में दिल्ली को आत्मनिर्भर बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत दिल्ली सरकार एनटीपीसी से बिजली ना खरीदकर वैकल्पिक ऊर्जा के साथ ही खुद की बिजली उत्पादित करेगी।
सरकार के इसी फैसले के बाद एनटीपीसी के चेयरपर्सन अरूप रॉय चौधरी ने यह फैसला किया है कि अगर दिल्ली उनकी बिजली को नहीं खरीदती तो वह अन्य खरीददारों को बिजली बेच देंगे। उनका यही फैसला दिल्ली को भीषण गर्मियों में रूला सकता है।
एनटीपीसी सप्लाई करती है 70% बिजली
गौरतलब है कि दिल्ली को मिलने वाली बिजली का एक बड़ा हिस्सा एनटीपीसी सप्लाई करती है। ऐसे में जब ज्यादा गर्मियां पड़ती हैं तो बिजली की मांग बढ़ जाती है और तब एनटीपीसी ही वह इकाई है जो दिल्ली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करती है।
बता दें कि इन गर्मियों में दिल्ली को 4600 मेगावाट बिजली की कमी पड़ेगी। दिल्ली में कुल बिजली का उत्पादन केवल 1100 मेगावाट का होता है। शेष 4500-5500 मेगावाट बिजली अन्य राज्यों या बिजली उत्पादन करने वाली इकाईयों से खरीदती है।
इसमें से 3000 मेगावाट बिजली तो केवल एनटीपीसी ही सप्लाई करती है। यानी दिल्ली की 70 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति एनटीपीसी ही करती है और अगर एनटीपीसी ही अपने हाथ खींच ले तो दिल्ली में बिजली के लिए त्राहि-त्राहि मचना तय है।
अब नहीं चेती केजरीवाल सरकार तो पड़ेगा बिजली का अकाल
गौरतलब है कि एनटीपीसी के चेयरमैन अरूप रॉय चौधरी ने कहा है कि दिल्ली की बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार के कहने पर कॉर्पोरेशन ने झज्जर, बदरपुर और दादरी पॉवर प्लांट पर भारी निवेष किया था। लेकिन अगर केजरीवाल सरकार उनसे बिजली नहीं खरीदेगी तो वो अन्य उपभोक्ताओं को बिजली बेच देंगे।
अरूप ने दिल्ली सरकार को चेताते हुए यह भी कहा कि अगर कॉर्पोरेशन ने अभी किसी अन्य ग्राहक से करार कर लिया तो वह दिल्ली को मांग बढ़ने के बाद भी बिजली की सप्लाई नहीं कर पाएगा।
आने वाले दिनों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए अधिकारियों का कहना है कि बिना एनटीपीसी से बिजली लिए राजधानी में बिजली आपूर्ति करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
ऐसे में केजरीवाल सरकार को यह सोचना होगा कि उसकी सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन करने और कोल ब्लॉक लेकर खुद की बिजली उत्पादन करने की योजना क्या दिल्लीवासियों को इस गरमी में बिजली संकट से निजात दिला पाएगी। क्योंकि एनटीपीसी के अलावा और कोई संस्था या राज्य नहीं है जो दिल्ली की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा कर सके।