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ये है वो खूनी सीवर जिसने एक साथ ले ली तीन इंसानों की जान, भगवान भरोसे हो रहा काम

Mon, 07 Aug 2017 03:06 PM IST
शुजात आलम/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पेट की खातिर जान जोखिम में डालते मजदूर
बिना सुरक्षा उपकरणों को ठेकेदार उतार देते हैं गहरे सीवर व मेनहोल में
कोर्ट के कड़े दिशा निर्देशों के बाद भी बरती जा रही है लापरवाही
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विस्तार
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राजधानी में सीवर सफाई के दौरान जान जाने का यह कोई पहला मामला नही है। हादसों के बाद खूब हल्ला होता है, कुछ दिन इसका जिक्र भी किया जाता है, लेकिन चंद दिन बीतते ही सुरक्षा उपायों को ताक पर रखकर सीवर, सेप्टिक टैंक या मेनहोल की सफाई दोबारा पुराने ढर्रे पर शुरू हो जाती है।
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यदि दिशा-निर्देशों का पालन हो तो शायद इस तरह के हादसों से बचा जा सकता है। लेकिन देखा गया है कि पेट की खातिर सफाई करने वाले मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर इस तरह के कार्यों को अंजाम देते हैं। ऐसे में वह सिर्फ किस्मत और भगवान भरोसे की काम करते हैं।

एमसीडी स्वच्छता कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष संजय गहलोत ने बताया कि अदालत ने सीवर या किसी भी मेनहोल के अंदर घुसकर सफाई करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। बावजूद इसके मजदूरों को लालच देकर सफाई करवाई जाती है।
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हादसे के बाद तमाशबीनों का लगा तांता...

संजय ने बताया कि पुराने और तजुर्बेकार लोग किसी भी सीवर या मेनहोल की सफाई करने से पूर्व उसमें माचिस की तिल्ली जलाकर नीचे फेंककर देखते थे। यदि कोई जहरीली गैस सीवर में मौजूद होती थी तो उसमें आग लग जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। ठेकेदार कम उम्र के लड़कों को रुपयों का लालच देकर सीवर की सफाई के लिए उतार देते हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि हालांकि सीवर या मेनहोल में सफाई के लिए उतरने पर पाबंदी है। लेकिन इसके बावजूद यदि कोई सीवर में उतरता भी है तो उसके पास गैस मास्क, गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सिलेंडर, एक टॉर्च, एक बेल्ट, जिसमें रस्सी बंधी और उसका सिरा ऊपर किसी अन्य कर्मचारी के हाथ में हो और गम शूज होना चाहिए। लेकिन एक भी मामले में इस तरह की सावधानी नहीं बरती जाती और लोग हादसे का शिकर हो जाते हैं। 

लाजपत नगर स्थित जल विहार के दफ्तर के नजदीक हुए हादसे की सूचना मिलते ही घटना स्थल पर तमाशबीनों का तांता लग गया। वहां मौजूद लोगों का कहना था कि चारों मजदूरों के साथ कुछ और लोग मौजूद थे। लेकिन हादसे के बाद वह वहां से निकल गए।
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सीवर में जहरीली गैस की चपेट में आकर मौत के कुछ मामले

इधर खबर मिलते ही पुलिस के आला अधिकरियों के अलावा दमकल कर्मी भी मौके पर पहुंच गए। काफी मशक्कत के बाद चारों को गहरे सीवर से बाहर निकाला गया। दमकल कर्मियों ने चारों को सीवर से निकालने के दौरान बहुत सावधानी बरती। इसके लिए ऑक्सीजन मॉस्क व अन्य उपकरणों का इंतजाम किया गया। तब जाकर उसे निकाला गया।

.  06 अगस्त 2017: लाजपत नगर इलाके में गहरे सीवर की सफाई के लिए उतरे मजदूरों में तीन की जहरीली गैस की चपेट में आकर मौत, वहीं एक बेहोश।
.  15 जुलाई 2017: वसंतकुंज के घिटोरनी गांव में फार्म हाउस के रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक की सफाई के लिए उतरे मजदूरों में चार की जहरीली गैस की चपेट में आकर मौत, एक बेहोश।
. 24 अगस्त 2015: स्वरूप नगर इलाके में सेप्टिक टैंक में सफाई के लिए उतरे दो मजदूरों की जहरीली गैस की चपेट में आकर दम घुटने से मौत।
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