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 निठारी कांड: डी-5 में ऐसे शुरू हुआ था हैवानियत का खेल

Sun, 03 Mar 2019 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा
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निठारी कांड
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निठारी कांड के दसवें केस में फांसी की सजा पा चुका सुरेंद्र कोली स्वादिष्ट खाना बनाने का एक्सपर्ट था। कोली अपने परिवार के साथ अल्मोड़ा में रहता था। वर्ष 2000 में उसकी जिंदगी में नया मोड़ आया जब उसकी मुलाकात दिल्ली में रहने वाले एक ब्रिगेडियर से हुई। वह उनके घर में खाना बनाने लगा।
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वर्ष 2003 में ब्रिगेडियर को दिल्ली से बाहर जाना पड़ गया। इसके बाद वह पंधेर के संपर्क में आया और निठारी सेक्टर-31 की डी-5 कोठी में काम करने लगा। शुरू में कोली पत्नी को भी साथ रखता था। जब 2004 में पंधेर का परिवार नोएडा से पंजाब चला गया तो कोली ने भी पत्नी को गांव भेज दिया। 

यहीं से हैवानियत की शुरुआत हुई। निठारी केस से जुड़े रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोठी में अक्सर कॉल गर्ल आया करती थीं। उनके लिए कोली ही खाने से लेकर अन्य व्यवस्था करता था। इसी दौरान वह उनसे भी नजदीकी बढ़ाना चाहता था, लेकिन नौकर होने की वजह से कामयाब नहीं हो पाता था। 
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इसलिए वह धीरे-धीरे कुंठित हो गया और मानसिक बीमारी से ग्रसित होता गया। इसके बाद वह बच्चों के प्रति आकर्षित होने लगा और मासूमों की जिंदगी से खेलने वाला हैवान बन गया।

क्या है निठारी कांड 
वर्ष 2005 से निठारी से बच्चे लापता हो रहे थे। इसकी जांच में 29 दिसंबर 2006 को नोएडा पुलिस ने डी-5 कोठी में बच्चों के मारे जाने का खुलासा करते हुए कोठी मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर और नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया था। कोठी से बच्चों और  युवती के कपड़े, चप्पलें, कंकाल बरामद हुए थे। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। 1 मार्च 2007 को कोली का इकबालिया बयान कोर्ट में दर्ज कराया गया था। कोली को पहली बार 13 फरवरी 2009 को किशोरी के कत्ल के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई थी।

समाजसेवियों ने निभाई थी जिम्मेदारी
सेक्टर-31 में ही रहने वाले समाजसेवी सतीश चंद्र मिश्रा व ऊषा ठाकुर ने इस प्रकरण को सबसे पहले उठाया था। तत्कालीन पुलिस अधिकारियों से मिलकर कहा था कि कोई गिरोह है तो बच्चों को उठा रहा है। उन्होंने इसकी शिकायत प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक की थी। जब पुलिस ने जांच शुरू की तो मामले बेहद ही संगीन निकला और एक के बाद एक कई खुलासे होते चले गए।

पंधेर को भी फांसी हो: पीड़ित पक्ष
निठारी कांड के पीड़ित अभी भी पंधेर को असली गुनहगार मानते हैं। इस घटना के पीड़ित झब्बू लाल डी-5 कोठी के सामने कपड़े प्रेस करने का काम करता है। इनकी बेटी अप्रैल 2005 में पास की दुकान से एक साड़ी में पीको कराने गई थी। इस दौरान गायब हो गई। सबने मिलकर खूब ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिली। झब्बू व उनके परिवार का कहना है कि कोली अकेला दोषी नहीं है। मोनिंदर मुख्य रूप से दोषी है। उसे भी
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