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बीएस-3 वाहनों के बाजार से बाहर होने से इस इंडस्ट्री को होगा फायदा, आएगा बूम

Fri, 31 Mar 2017 12:10 PM IST
योगेश शर्मा/अमर उजाल, फरीदाबाद
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बीएस-3 वाहन - फोटो : अमर उजाला
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कल यानी 1 अप्रैल से देश में केवल बीएस-4 मानक के वाहन ही बनाए व बेचे जा सकेंगे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने अचानक देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर को जोर का झटका दिया है, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े जानकार कोर्ट के इस फैसले को ऑटो कंपोनेंट्स तैयार करने वाली इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत मान रहे हैं।
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बीएस-3 मॉडल के अचानक बाजार से गायब होने के बाद बाजार की मांग को पूरी करने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों को उत्पादन बढ़ाना होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में ऑटो कंपोनेंट्स इंडस्ट्री में जबरदस्त बूम आने की उम्मीद जगी है।

30 मार्च तक तकरीबन 8.24 लाख बीएस-3 वाहन कंपनियों के स्टॉक बताए जा रहे थे, दुपहिया वाहन निर्माता कंपनियों ने अच्छा-खासा डिस्काउंट देकर बीएस-3 मॉडल का पुराना स्टॉक निकालने का विकल्प आजमाया है।
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अगले दो महीने के लिए शुभ संकेत

वाहन - फोटो : अमर उजाला
सूई से लेकर हवाई जहाज के कलपुर्जे तैयार करने वाले मैन्युफैक्चरिंग हब फरीदाबाद की ऑटो कंपोनेंट्स इंडस्ट्री सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अगले दो महीने के लिए शुभ संकेत मान रही है।

मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन फरीदाबाद के पूर्व प्रधान नरेश वर्मा बताते हैं कि तीन कड़ियों में ऑटोमोबाइल मैन्युफै क्चरिंग इंडस्ट्री चलती है, जिसमें डीलर, पार्ट्स बनाने वाला मैन्युफै क्चरर्स और वाहन निर्माता कंपनी अपने पास एक-एक महीने का स्टॉक लेकर चलती है।

एक अप्रैल के बाद बाजार में बीएस-3 मॉडल के वाहन नहीं रहेंगे। ऐसे में विशेषकर दुपहिया निर्माता कंपनियों को अब पार्ट्स बनाने वाले वेंडरों के शेड्यूल में 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी कर उत्पादन में तेजी लानी होगी।

मसलन, जिसके पास 50 हजार कंपोनेंट्स बनाने का ऑर्डर था, कंपनियां अब उस ऑर्डर को बढ़ाकर 60 से 70 हजार करेंगे। कम से कम अप्रैल और मई में ऑटो कंपोनेंट्स इंडस्ट्री की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।

पुराना स्टॉक ठिकाने लगाना आसान नहीं
ऑटो कंपोनेंट्स एक्सपर्ट एवं अमर उजाला एमएसएमई अवार्ड विजेता लव मल्होत्रा ने बताया कि बीएस-3 मॉडल के 12 हजार करोड़ का स्टॉक ठिकाने लगाना इतना आसान नहीं है। वाहन निर्माता कंपनियों के लिए ऐसे वाहन को एक्सपोर्ट कर पाना भी मुश्किल है। इसके अलावा पुरानी इंवेंटरी को नए मानक के अनुसार बनाना भी मुश्किल है। इसमें सबसे बड़ी मार ट्रांसपोर्टेशन की लागत की पड़ेगी। ऐसे में कंपनियों ने डिस्काउंट ऑफर देकर नुकसान को साधने की कोशिश की है। इसका असर हफ्ते दस दिन से ज्यादा नहीं रहेगा। ऑटो कंपोनेंट्स इंडस्ट्री के लिए आने वाला कुछ समय बेहतर होगा।
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